BMC के चुनाव नतीजों के बाद अब असली राजनीतिक लड़ाई मेयर की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच सत्ता की साझेदारी को लेकर पेंच फंसा हुआ है.

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ऐसे में अब सबकी निगाहें एकनाथ शिंदे पर टिकी हुई हैं. शुक्रवार (18 जनवरी) को आए नतीजों में एकनाथ शिंदे 'किंगमेकर' की भूमिका में है. चुनाव के नतीजों के बाद अब एकनाथ शिंदे की पार्टी के जीते हुए पार्षदों के बिना महायुति का मेयर बनना मुश्किल है. आइए मेयर की कुर्सी को लेकर महाराष्ट्र का सियासी गणित समझते हैं.

आंकड़ों का गणित और शिंदे की 'किंगमेकर' भूमिका

बीएमसी की 227 सीटों में से बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है. बीजेपी को अपना मेयर बनाने के लिए शिंदे सेना की 29 सीटों का समर्थन अनिवार्य है. दोनों के पास कुल 118 सदस्य हैं, जो बहुमत के आंकड़े को पार कर लेते हैं. यही कारण है कि शिंदे गुट इस समय 'किंगमेकर' की भूमिका में है और अपनी शर्तें रख रहे हैं.

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वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • बीजेपी: 89 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से 25 कम)  
  • शिंदे शिवसेना: 29 सीटें
  • उद्धव शिवसेना: 65 सीटें
  • अन्य: कांग्रेस (24), एमआईएम (8), एमएनएस (6)

होटल पॉलिटिक्स: पार्षदों की बाड़ेबंदी

शनिवार को एकनाथ शिंदे ने अपने सभी 29 पार्षदों को बांद्रा के एक फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया. इसकी वजह यह है कि पार्टी को डर है कि उनके पार्षदों को तोड़ा जा सकता है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी ने इसे तीन दिवसीय 'वर्कशॉप' बताया है, जिसमें पार्षदों को बीएमसी के कामकाज और विकास योजनाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी.

शिवसेना एकनाथ शिंदे की पार्टी के राहुल शेवाले जैसे नेताओं का कहना है कि यह बैठक आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी और बालासाहेब ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बुलाई गई है.

शिंदे की शिवसेना की बड़ी मांगें

सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट ने गठबंधन के सामने अपनी अहम मांगें रखी हैं. वे चाहते हैं कि 5 साल के कार्यकाल में पहले 2.5 साल शिंदे सेना का मेयर हो. साथ ही बीएमसी की सबसे शक्तिशाली 'स्टैंडिंग कमेटी' (स्थायी समिति) के अध्यक्ष पद पर भी उनकी नजर है. वे 2:1 के अनुपात में पदों का बंटवारा चाहते हैं.

फडणवीस का भरोसा

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की 'हार्स-ट्रेडिंग' (पार्षदों की खरीद-फरोख्त) नहीं होगी. उन्होंने कहा कि मैं और शिंदे साथ मिलकर फैसला लेंगे और मुंबई को सुचारू रूप से चलाएंगे. वे वर्तमान में पुणे के पार्षदों से मिल रहे हैं और उनके दावोस (Davos) से लौटने के बाद ही अंतिम फैसला होने की उम्मीद है. 

उद्धव ठाकरे का तंज

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी की 'इस्तेमाल करो और फेंक दो' (Use and Throw) की नीति रही है. उन्होंने कहा कि जो लोग खुद भागकर आए थे, आज उन्हें अपने ही लोगों के भागने का डर सता रहा है.

एकनाथ शिंदे के पास सत्ता की चाबी

मुंबई की सत्ता की चाबी फिलहाल एकनाथ शिंदे के पास है. जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते मेयर पद पर अपना दावा चाहती है, वहीं शिंदे गुट गठबंधन में अपना 'सम्मान' और 'वर्चस्व' बनाए रखने के लिए अड़ा हुआ है. 

आने वाले हफ्ते में जब मुख्यमंत्री फडणवीस विदेश दौरे से लौटेंगे, तब यह साफ होगा कि क्या बीजेपी शिंदे की 2.5 साल के मेयर वाली शर्त मानती है या कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है.