महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे दोनों एक सुर में कह रहे हैं कि मुंबई का मेयर महायुति का ही बनेगा, लेकिन दोनों में से कोई भी अभी डंके की चोट पर बोलने को तैयार नहीं हैं कि मेयर की कुर्सी आखिरकार किसके हिस्से में आएगी, बीजेपी के या फिर शिवसेना के? सवाल ये भी है कि क्या मुंबई में अड़ंगेबाजी के पीछे कल्याण की सौदेबाजी है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विश्व आर्थिक मंच में शामिल होने के लिए दावोस में हैं. वहां से वो आर्थिक मंत्रों के साथ-साथ मराठी संस्कृति की झलक भी महाराष्ट्र तक पहुंचा रहे हैं. इधर, मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में शनिवार (17 जनवरी) शाम से ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सभी 29 नए पार्षद डेरा डाले हुए हैं.
शिवसेना की 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स'!
विपक्ष और खास कर उद्धव ठाकरे की शिवसेना इसे 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' करार दे रही है. शिंदे की शिवसेना इसे नए पार्षदों के लिए ओरिएंटेशन वर्कशॉप यानी प्रशिक्षण सत्र का नाम दे रही है. जबकि राजनीतिक पंडितों के मुताबिक होटल में शिंदे की शिवसेना के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों की बाड़ेबंदी का सीधा रिश्ता मेयर चुनाव से है.
क्या शिंदे बीजेपी के मेयर की राह में रुकावट?
ऐसे में सवाल ये कि क्या वाकई एकनाथ शिंदे मुंबई में बीजेपी के मेयर की राह में रुकावट बन गए हैं? क्या सचमुच वो ढाई-ढाई साल के मेयर के फॉर्मूले पर अड़ गए हैं? बीएमसी में स्थाई समिति अध्यक्ष समेत अहम पदों के लिए वो दबाव की राजनीति कर रहे हैं? शिंदे को डर है कि कहीं उद्धव ठाकरे उनके नए नवेले पार्षदों को तोड़ न लें? फडणवीस के 24 जनवरी को विदेश से लौटते ही मुंबई के मेयर की गुत्थी सुलझ जाएगी? फिलहाल, इन सारे सवालों के जवाब शिंदे को देने हैं. लेकिन अभी वो सिर्फ फडणवीस की लाइन ही दोहरा रहे हैं कि मेयर महायुति का ही बनेगा.
बीएमसी में मेयर की कुर्सी पर शिंदे की नजर!
इसी गठबंधन में शिंदे बीजेपी से आधे से भी कम विधायकों के साथ 2022 में मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इसी तर्ज पर बीएमसी के मेयर की मलाईदार कुर्सी पर उनकी ओर से नजरें गड़ाना लाजिमी है. इस बीच उद्धव ठाकरे के बाद आज संजय राउत ने भी बीएमसी में पासा पलट देने का इशारा कर नई खलबली मचा दी है.
चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं उद्धव ठाकरे
मुंबई के पॉलिटिकल कॉरिडोर में चर्चा इस बात की भी है कि एकनाथ शिंदे को बीएमसी की सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना (UBT) मेयर चुनाव के मतदान से गैरहाजिर रह सकती है. बीएमसी के कुल 227 पार्षदों में से शिवसेना(UBT) ने अपने 65 नगर सेवकों को मतदान से दूर रखा तो फिर बहुमत का गणित 82 हो जाएगा और ऐसी सूरत में 89 पार्षदों वाली बीजेपी का मेयर आसानी से बन जाएगा.
वैसे, शिवसेना (UBT) की ओर से बार-बार अपना मेयर बनाने की बात भी कही जा रही है जो बिना एकनाथ शिंदे के पार्षदों को तोड़े मुमकिन नहीं है. लेकिन उद्धव ठाकरे और संजय राउत के इस अरमान पर फिलहाल शिंदे की शिवसेना और बीजेपी दोनों एक साथ पानी फेरती दिख रही है.
मुंबई में बीजेपी को शिवसेना के समर्थन की जरूरत
गौर करने वाली बात ये भी कि जैसे मुंबई में अपने मेयर के लिए बीजेपी को शिवसेना के समर्थन की जरूरत है. ठीक उसी तरह से एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के संसदीय क्षेत्र कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना के मेयर के लिए बीजेपी के समर्थन की दरकार है.
मेयर की कुर्सी पर बीजेपी का दावा
227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए बहुमत का आंकड़ा 114 है. बीजेपी के 89 पार्षद हैं. जबकि शिवसेना के 29 जीते हैं. दोनों को मिलाकर 118 पार्षद होते हैं. गठबंधन में बड़ी पार्टी बीजेपी है. इस हिसाब से मेयर की कुर्सी पर उसका दावा है.
कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना बड़ी पार्टी
जबकि 122 सीटों वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत का नंबर 62 है. यहां शिवसेना के 53 पार्षद जीते हैं तो बीजेपी के 50. सिर्फ 3 सीटों के मामूली अंत से बड़ी पार्टी शिवसेना है. गठबंधन में बड़ी पार्टी वाले फॉर्मूले पर यहां मेयर की कुर्सी पर शिवसेना की दावेदारी बनती है. ऐसे में अगर शिवसेना ने मुंबई में इधर-उधर किया तो फिर कल्याण-डोंबिवली में उसके मेयर का ख्वाब भी टूट सकता है.
मेयर की कुर्सी के लिए राजनीतिक लड़ाई!
कुल मिलाकर BMC के चुनाव नतीजों के बाद अब असली राजनीतिक लड़ाई मेयर की कुर्सी को लेकर शुरू है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच सत्ता की साझेदारी को लेकर पेंच फंसा हुआ है.
'किंगमेकर' की भूमिका में शिंदे गुट
बीजेपी को अपना मेयर बनाने के लिए शिंदे सेना की 29 सीटों का समर्थन अनिवार्य है. दोनों के पास कुल 118 सदस्य हैं, जो बहुमत के आंकड़े को पार कर लेते हैं. यही कारण है कि शिंदे गुट इस समय 'किंगमेकर' की भूमिका में है और अपनी शर्तें रख रहा है. सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट ने गठबंधन के सामने अपनी अहम मांगें रखी हैं. वे चाहते हैं कि 5 साल के कार्यकाल में पहले 2.5 साल शिंदे सेना का मेयर हो. बीएमसी की सबसे शक्तिशाली 'स्टैंडिंग कमेटी' (स्थायी समिति) के अध्यक्ष पद पर भी उनकी नजर है. वे 2:1 के अनुपात में पदों का बंटवारा चाहते हैं.
शिंदे की शर्त को मानेंगे सीएम देवेंद्र फडणवीस?
मुंबई की सत्ता की चाबी फिलहाल एकनाथ शिंदे के पास है. जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते मेयर पद पर अपना दावा चाहती है, वहीं शिंदे गुट गठबंधन में अपना 'सम्मान' और 'वर्चस्व' बनाए रखने के लिए अड़ा हुआ है. आने वाले हफ्ते में जब मुख्यमंत्री फडणवीस विदेश दौरे से लौटेंगे, तब यह साफ होगा कि क्या बीजेपी शिंदे की 2.5 साल के मेयर वाली शर्त मानती है या कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है.