बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव से पहले महाराष्ट्र में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है. कौन किसके साथ लड़ेगा, किसे कितनी सीटें मिलेंगी और गठबंधन वाली पार्टियों के बीच समन्वय बनेगा या नहीं, इसे लेकर रोज नए राजनीतिक समीकरण सामने आ रहे हैं.
इसी बीच अपने स्थापना दिवस के दिन कांग्रेस पार्टी ने बड़ा ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ बीएमसी चुनाव में गठबंधन का ऐलान किया है. बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं, जिनमें से वंचित बहुजन आघाड़ी 62 वार्डों में चुनाव लड़ेगी.
बीएमसी तक सीमित नहीं रहेगा यह गठबंधन!
जानकारी के अनुसार, यह गठबंधन सिर्फ बीएमसी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों में लागू होगा. यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी एक साथ चुनावी मैदान में उतरेंगी. इससे पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों दलों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थी.
एक बार फिर दोनों साथ आ रहे हैं- हर्षवर्धन सपकाल
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि जब वंचित बहुजन आघाड़ी का नाम भारीप बहुजन महासंघ था, तब 1998 से 1999 तक कांग्रेस आंबेडकर जी के साथ थी. अब एक बार फिर दोनों साथ आ रहे हैं और दोनों नैसर्गिक पार्टनर हैं. उन्होंने कहा कि दोनों दल संवैधानिक विचारों पर चलने वाले हैं. संविधान को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबा साहेब आंबेडकर के बीच मतभिन्नता रही होगी, लेकिन मनभिन्नता कभी नहीं रही, क्योंकि दोनों का उद्देश्य एक ही था.
उन्होंने कहा कि आज मुंबई से इस गठबंधन की घोषणा की जा रही है और आज से कांग्रेस तथा वंचित बहुजन आघाड़ी मित्र पक्ष हैं. यह गठबंधन विचारधारा को लेकर है, जिसमें संविधानवादी और मनुवादी विचारों की लड़ाई में साथ आना ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के स्थापना दिवस पर इस गठबंधन का होना विशेष महत्व रखता है.
वंचित बहुजन आघाड़ी ने क्या कहा?
वंचित बहुजन आघाड़ी के डॉ. धैर्यवान पुंडकर ने कहा कि अगर यह गठबंधन 2014 में हुआ होता तो केंद्र में बीजेपी सत्ता में नहीं आती. उन्होंने कहा कि देर आए दुरुस्त आए. इस गठबंधन के लिए वंचित बहुजन आघाड़ी की मुंबई टीम ने काफी मेहनत की है और प्रकाश अंबेडकर ने इसे मान्यता दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वंचित बहुजन आघाड़ी मुंबई में 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी महानगरपालिकाओं को लेकर बातचीत अभी जारी है.