पुणे में जेल में बंद स्थानीय बदमाश बंदू अंडेकर का महापालिका चुनाव के लिए नामांकन पत्र अधूरा रह गया है. पुलिस सुरक्षा में शनिवार (27 दिसंबर) को उसे नामांकन के लिए लाया गया, लेकिन दस्तावेज पूरे न होने से फॉर्म स्वीकार नहीं हुआ. अब सोमवार 29 दिसंबर को ये प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश एक बार फिर से की जाएगी.
बता दें कि पुणे की विशेष मकोका अदालत ने बंदू अंडेकर को सशर्त अनुमति दी थी कि वह महापालिका चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकता है. इसी आदेश के बाद 27 दिसंबर को उसे येरवडा केंद्रीय कारागार से पुलिस वैन के जरिए भवानी पेठ स्थित निर्धारित सरकारी केंद्र लाया गया. इस दौरान उसका चेहरा काले कपड़े से ढंका हुआ था और दोनों हाथ रस्सी से बंधे हुए थे. केंद्र के भीतर ले जाते समय अंडेकर ने अपने समर्थन में 'नेकी का काम अंडेकर का नाम, अंडेकारों को वोट मतलब विकास को वोट' के नारे भी लगाए.
चुनाव अधिकारियों का फैसला और कानूनी पक्ष
चुनाव अधिकारियों के अनुसार बंदू अंडेकर द्वारा प्रस्तुत किया गया नामांकन पत्र अधूरा था, इसलिए उसे तत्काल स्वीकार नहीं किया जा सका. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं मानी गई.
अंडेकर के वकील मिथुन चव्हाण ने बताया कि नामांकन दाखिल कर दिया गया है, लेकिन कुछ औपचारिक दस्तावेज अभी बाकी हैं. पीटीआई के अनुसार, इन्हें पूरा करने के लिए अंडेकर को 29 दिसंबर को दोबारा नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. चव्हाण के मुताबिक अंडेकर भवानी पेठ वार्ड कार्यालय से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरना चाहता है.
परिवार के अन्य नामांकन और चुनावी पृष्ठभूमि
अंडेकर की भाभी लक्ष्मी अंडेकर और बहू सोनाली अंडेकर ने भी अदालत की अनुमति के बाद अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं. ये दोनों भी आयुष की हत्या से जुड़े मामले में आरोपी हैं. आयुष की पांच सितंबर को नाना पेठ इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह गणेश कोमकर का बेटा था, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पूर्व पार्षद और बंदू अंडेकर के बेटे वनराज अंडेकर की हत्या के मामले में आरोपी है. पुणे सहित महाराष्ट्र की 28 अन्य महानगर पालिकाओं के चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है, ऐसे में यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.