नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर धरने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा एवं अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीति गरमा गई है. इस बीच महाराष्ट्र AIMIM नेता वारिस पठान की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा, "यह छात्रों का प्रदर्शन है उनका अधिकार है. छात्रों की जो मांग है उस पर सरकार को विचार करना चाहिए. इसका राजनीतिकरण करके कोई फायदा नहीं है. हमारी पार्टी भी को कंधे से कंधे मिलाकर खड़ी है."
उन्होंने आगे कहा, "छात्र हमारे देश का भविष्य हैं. आज उनके अंदर आक्रोश है. उनका दिल दुखा हुआ है. उनको तकलीफ है कि इतने सारे छात्रों ने आत्महत्या कर ली. इस तरह से पेपर बार-बार लीक हो रहा है तो उनके करियर के साथ कब तक आप खिलवाड़ करेंगे. इसलिए सरकार को उनकी मांग पर विचार कर उनकी मांग को मानना चाहिए."
छात्रों को आंतकवादी बताए जाने पर क्या बोले वारिस पठान?
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को आतंकवादी बताए जाने पर वारिस पठान ने कहा, "यह बिल्कुल गलत है. स्टूडेंट को इस तरह से आतंकवादी बोलना या नोटंकीबाज बोलना सरासर गलत है. वो हक और इंसाफ के लिए जंतर-मंतर पर बैठे हुए हैं. वह संवैधानिक तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे हैं तो आपको इस तरह से बोलने का अधिकार किसने दिया."
उन्होंने आगे कहा, "मैं चाहूंगा कि सरकार को इसको नोट कर बात करना चाहिए. ऐसे छात्रों को आतंकवादियों से जोड़ेंगे क्या. यह सब गलत है. इस तरह की बयानबाजी नहीं होना चाहिए. छात्र हैं यह हमारे देश का भविष्य हैं अपने हक और इंसाफ के लिए वह खड़े हुए हैं. इसलिए सबको उनके लिए आगे आकर बात करना चाहिए."
अलग-अलग राज्यों में UCC लाने पर क्या कहा?
राज्य विधानसभा द्वारा यूसीसी (समान नागरिक संहिता) विधेयक पारित करने पर उन्होंने आगे कहा, “.मुख्य मुद्दा एकरूपता है; हमने ऐसे उदाहरण देखे हैं जहां आदिवासी समुदायों को बाहर रखा गया है. यह सरकार द्वारा हिंदू कानून थोपने का प्रयास प्रतीत होता है. हम मुसलमानों पर लागू उत्तराधिकार और विवाह कानूनों का क्या होगा?”
जामिया के छात्रों के साथ कार्रवाई याद है- वारिस पठान
वारिस पठान ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग हुआ हो. इससे पहले वकीलों के आंदोलन, किसान आंदोलन और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई आज भी लोगों को याद है. लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार संविधान ने दिया है और सरकार को असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उससे संवाद करना चाहिए.
छात्र अहिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं- वारिस पठान
संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है. छात्र तिरंगा और संविधान हाथ में लेकर अहिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.नीट और टीईटी पेपर लीक का उल्लेख करते हुए पठान ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
नीट परीक्षा में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और युवाओं में गहरा आक्रोश है. छात्र केवल यह मांग कर रहे हैं कि जिनकी वजह से उनका भविष्य प्रभावित हुआ है, उनकी जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. सरकार इस मुद्दे पर छात्रों से बातचीत करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है.
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