BMC चुनाव 2026 को लेकर MNS और शिवसेना UBT द्वारा संयुक्त घोषणापत्र जारी किए जाने पर AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ये दल चुनाव से पहले कुछ कहते हैं और चुनाव के बाद अपने वादों से पलट जाते हैं. 

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वारिस पठान के मुताबिक, महानगरपालिका चुनाव जमीनी हकीकत और स्थानीय विकास से जुड़ा होता है, लेकिन इस पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हो रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मेयर वही बनेगा जिसे जनता मोहब्बत से चुनेगी और अंतिम फैसला पूरी तरह जनता पर निर्भर करता है.

घोषणापत्र और राजनीतिक वादों पर सवाल

वारिस पठान ने कहा कि उन्होंने अभी तक शिवसेना और कांग्रेस का मेनिफेस्टो न देखा है और न पढ़ा है, इसलिए उस पर सीधी टिप्पणी नहीं कर सकते. हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि ये दल अपने घोषणापत्र में बड़े-बड़े वादे तो करते हैं, लेकिन असल में उन्होंने किया क्या है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले लाडकी बहिन योजना लाई गई, खातों में पैसे आने लगे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को भुला दिया गया.

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उन्होंने दावा किया कि आज भी कई महिलाओं के खातों में पैसे नहीं आ रहे हैं और AIMIM को लगातार फोन मिल रहे हैं. महिलाएं कहती हैं कि उन्होंने EMI के भरोसे खर्च किया, लेकिन अब राशि बंद हो गई है.

BMC चुनाव और जमीनी मुद्दों की अनदेखी!

पठान ने कहा कि BMC चुनाव असल में विकास से जुड़ा चुनाव होता है. इसमें सड़कों की हालत, गड्ढे, नल जल आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम जैसे मुद्दे अहम होते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से इन मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति और BJP जानबूझकर जनता का ध्यान भटका रही हैं और धार्मिक नारों को आगे कर रही हैं.

उनके अनुसार जब कहा जाता है कि 'I Love Mahadev' बोलने वाला ही मेयर बनेगा या केवल हिंदू ही मेयर बनेगा, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि वे संविधान को मानते हैं और संविधान में कहीं नहीं लिखा कि कौन मेयर बन सकता है और कौन नहीं.

मेयर पद, संविधान और धार्मिक बयानबाजी

वारिस पठान ने कहा कि जब मंत्री इस तरह के बयान देते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि अगर 'I Love Mahadev' बोलने वाला मेयर बन सकता है, तो 'I Love Mohammed' बोलने वाला मेयर क्यों नहीं बन सकता. उन्होंने यह भी कहा कि खान, पठान, शेख, सैयद, अंसारी या कुरैशी भी मुंबई का मेयर बन सकता है और एक दिन हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला भी मेयर बन सकती है. 

उन्होंने एएनआई को दिए बयान में कहा कि वह किसी विदेशी महिला की नहीं, बल्कि भारतीय मुस्लिम महिला की बात कर रहे थे. उन्होंने उदाहरण दिया कि देश का राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस मुस्लिम हो चुका है, प्रधानमंत्री ने मुस्लिम नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया है और महाराष्ट्र में पहले भी मुस्लिम मेयर रह चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वाले बयान देकर कुछ लोग मंत्री बन गए, लेकिन अब भी सुधार नहीं कर रहे. पठान ने दो टूक कहा कि वह मुंबई में पैदा हुए हैं, मुंबई में ही जिएंगे और खुद को गर्व से भारतीय मुसलमान और मुंबईकर कहते हैं.