समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा में मांग की है कि रमजान के महीने में सरकार में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों को शाम 4 बजे छुट्टी दी जाए, ताकि वे समय पर नमाज अदा कर सकें. आजमी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल में मुसलमान भी थे और उनके राज में मस्जिदों और दरगाहों को मदद दी जाती थी, उनके खर्च के लिए जागीरें दी गईं. उन्होंने कहा कि यदि सरकार दावा करती है कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के मूल्यों और आदर्शों पर चलती है तो उसे रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को सहूलियत देनी चाहिए.

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'इस्लाम में समय पर नमाज पढ़ना जरूरी'

अबू आजमी उदाहरण देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने रमजान के दौरान कर्मचारियों को रियायत दी थी, ताकि वे समय पर घर जा सकें. सपा विधायक ने कहा कि इस्लाम में समय पर नमाज पढ़ना जरूरी है और अगर कोई व्यक्ति कार्यस्थल पर नमाज अदा करता है तो उसे लेकर विवाद खड़ा हो जाता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि एक फार्मेसी कॉलेज में तीन छात्रों को नमाज पढ़ने पर अपमानित किया गया.

'रमजान के दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित न'

साथ ही आजमी ने मांग की कि जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां रमजान के दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित न हो और सुचारू रूप से दी जाए.

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बीजेपी विधायक अमित साटम ने किया विरोध

वहीं, बीजेपी विधायक अमित साटम ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि गणेश उत्सव, दिवाली या नवरात्रि जैसे हिंदू त्योहारों के दौरान क्या सरकारी कर्मचारियों को विशेष छुट्टी दी जाती है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान समाज को धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास है.

किसी एक धर्म का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए- प्रसाद लाड़

बीजेपी विधायक प्रसाद लाड़ ने भी कहा कि किसी एक धर्म का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी को पूजा-पाठ करना है तो उसकी व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष तौर पर दो घंटे या पहले छुट्टी की मांग उचित नहीं है. इस मुद्दे पर विधानसभा में सियासी घमासान तेज हो गया है.

कांग्रेस ने क्या कहा?

कांग्रेस के MLC भाई जगताप ने रमजान पर छुट्टी को लेकर कहा कि यह भावनात्मक विषय है अगर विचार होता है तो अच्छा है.