एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बताया कि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर 28 जनवरी को हुई दुर्घटना, जिसमें अजित पवार की मृत्यु हुई, उस संबंध में अपनी शंकाएं और मांगें रखीं. रोहित पवार ने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने जो सवाल सार्वजनिक रूप से उठाए थे, वही सभी बिंदु और संबंधित रिसर्च पेपर तथा जानकारी मुख्यमंत्री को सौंप दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में गंभीरता से फॉलोअप किया जाए और जरूरत पड़े तो देश के गृहमंत्री के समक्ष भी विषय रखा जाए.

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सीएम ने रोहित पवार से क्या कहा?

उन्होंने मांग की कि पूरी जांच पारदर्शी तरीके से हो. मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों से तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर आगे की प्रक्रिया समझी जाएगी. रोहित पवार ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से रिपोर्ट आने की उम्मीद है और 'बस यूं ही नहीं' बल्कि विस्तृत रिपोर्ट दी जानी चाहिए. उन्होंने सोमवार सुबह 11 बजे विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर और खुलासे करने की बात भी कही.

रोहित पवार ने मांग की कि देवगिरी बंगले का नाम अजित दादा के नाम पर किया जाए, विधान भवन परिसर में उनका स्मारक बनाया जाए, बारामती हवाई अड्डे को अत्याधुनिक बनाया जाए और वहां नाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू कर उसका नाम अजित पवार के नाम पर रखा जाए. इसके अलावा पुणे रिंग रोड को भी उनके नाम से जोड़े जाने की मांग की गई है.

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उन्होंने कहा कि बारामती में FIR दर्ज हो, ऐसी इच्छा थी, लेकिन भीड़ की आशंका के चलते वे मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन गए और बीएनएस कानून के तहत जीरो FIR दर्ज करने की मांग की. वहां मामला दर्ज नहीं होने पर उन्होंने घटना स्थल बारामती में FIR दर्ज करने की मांग की और CID जांच के लिए भी प्रयास किया.

सुनेत्रा पवार के संदर्भ में रोहित पवार ने दावा किया कि कुछ नेता अजित दादा को परेशान करते थे और पार्टी पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि दबाव के बाद नेतृत्व सुनेत्रा पवार को दिया गया.

धनंजय मुंडे के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल राजनीति कर रहे हैं और सत्ता में होने के बावजूद इस मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहे.

वहीं, नरहरी झिरवळ के मामले में रोहित पवार ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसी अन्य व्यक्ति को मंत्री पद दिया जा सके.

इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.