मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. शहडोल जिले के उत्तर वन मंडल में बिजली के करंट से दो बाघों की दर्दनाक मौत के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है. पीसीसीएफ (PCCF) वी.एन. अम्बाड़े के निर्देश पर सख्त कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर बृहस्पति पटेल और बीट गार्ड राजेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. वहीं, संबंधित रेंजर को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है.

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घटना शहडोल के जयसिंहनगर रेंज की है, जहां फसलों की सुरक्षा के नाम पर अवैध रूप से करंट बिछाया गया था. 29 जनवरी की रात दो बाघ इस जानलेवा करंट की चपेट में आ गए. हैरान करने वाली बात यह है कि शिकार के बाद आरोपी साक्ष्य मिटाने और शवों को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वन विभाग ने घेराबंदी कर 7 लोगों को दबोच लिया.

2026 की शुरुआत ही खौफनाक: 37 दिनों में 9 मौतें

मध्य प्रदेश जिसे बड़े गर्व से 'टाइगर स्टेट' कहा जाता है, वहां के आंकड़े डराने वाले हैं. जनवरी 2026 में ही अकेले 7 बाघों की जान जा चुकी है. फरवरी के पहले सप्ताह तक यह आंकड़ा बढ़कर 9 पहुँच गया है. पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड देखें तो 2021 से अब तक 224 बाघ दम तोड़ चुके हैं.

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बाघों की मौत का 5 वर्षीय ग्राफ

वर्ष (Year)बाघों की मौत (Tiger Deaths)
202134
202243
202345
202446
202556
2026 (अब तक)9

सिस्टम और लापरवाही पर उठे सवाल

पीसीसीएफ वी.एन. अम्बाड़े ने स्वीकार किया कि बाघों की मौत की एक बड़ी वजह मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही है. उन्होंने कहा, "सिर्फ जंगल में घूमना काफी नहीं है, अब स्मार्ट पेट्रोलिंग की जरूरत है. लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा."

दूसरी ओर, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अरबों रुपये का बजट होने के बावजूद सिस्टम लाचार है. उन्होंने इसे पूरी तरह 'प्रशासनिक विफलता' करार दिया है.

हाईकोर्ट की सख्ती का भी असर नहीं?

गौरतलब है कि अभी 20 जनवरी को ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाघों की लगातार हो रही मौतों पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट की इस सख्ती के बावजूद शहडोल जैसी घटनाएं सुरक्षा दावों की पोल खोल रही हैं.