Mandu News:  भारत कि संस्कृति को विश्वभर मे पसंद किया जाता हैं ओर इसी संस्कृति को देखने के लिए हर साल लाखो विदेशी सेलनी भारत आते हैं. हमारे देश के इस संस्कृति से कई लोग प्रभावित हो कर यही के हो कर रह जाते हैं. दरअसल 10 वर्ष पहले मांडू घूमने आई फ्रांस की विदेशी महिला मारी को मांडू  इतना भाया की वह मांडू की होकर ही रह गई. मारी को मांडू के प्रसिद्ध गाइड धीरज चौधरी ने घुमाया मांडू और अपना जीवनसाथी भी बनाया और भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर मांडू में प्राचीन पद्धति और प्राकृतिक संसाधनों से प्रदेश का पहला ऐसा मकान जो पर्यटन के क्षेत्र में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा.


यूं तो आपने आधुनिकता के दौर में कई मकान देखे होंगे जो आज की जीवन शैली में जिनका अपना अलग महत्व होता है , उससे अलग यह मकान मांडू के वार्ड क्रमांक 8 नीलकंठ क्षेत्र में 2000 स्क्वायर फीट में 95% बनकर तैयार हो गया है स्वयं यह विदेशी फिरंगी महिला मारी खुद कारागीर के साथ मिलकर इसे डिजाइन दे रही हैं. फ़्रांस कि महिला ने भारत कि इस संस्कृति से प्रभावित को हो कर मध्यप्रदेश के प्रायटन स्थल मांडू मे रह हैं. साथ ही फ़्रांस कि ये महिला प्राकृतिक संसाधनों से यहां प्रदेश का एक ऐसा घर बना रही हैं. जो आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं. मांडू के नीलकंठ क्षेत्र में  2000 स्क्वायर फिट मे बन रहे इस घर को विदेशी महिला खुद कारीगरी के साथ डिजाइन दे रही हैं. 95% बन कर तैयार हो चुके इस घर के पूरा बनने के बाद ये घर अपने आप मे आकर्षण का केंद्र होगा.


पर्यटक भी ले सकेंगे इस घर का लाभ
वहीं प्राकृतिक संसाधनों से बने पर्यटन नगरी मांडव के इस मकान में फ्रांस की झलक नजर आने लगी है. इस मकान में ना तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है और ना ही रेत आदि का. वही मारी के पति और नेशनल गाइड धीरज चौधरी के अनुसार दो हजार स्क्वायर फीट के प्लाट पर बनने वाले इस प्राकृतिक मकान का आने वाले दिनों में पर्यटक भी लाभ ले सकेंगे.


वहीं पिछले 10 सालों से देश में रह रही मारी भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर एक सच्ची गृहणी बनी है. वही मारी को दो संताने है. एक का नाम का काशी चौधरी व दूसरे का नाम नील चौधरी रखा गया है जिन्हें वह खुद ही फ्रांस और भारतीय संस्कृति की शिक्षा दे रही है.  मारी पेशे से खुद एक शिक्षक है. खास बात यह है कि मारी इलेक्ट्रॉनिक टीवी मोबाइल से दूर रहना चाहती है अपने बच्चों को दिन भर अपने साथ बच्चों को रखकर उन्हें फ्रांस और भारतीय संस्कृति से आत्मसात करने में लगी रहती.


दो साल से बन रहा मकान
मांडू में आकर बसी मारी ने हर जगह यहां पर सीमेंट कंक्रीट के मकानों को बनते देखा. तभी मारी ने फैसला लिया कि हम मांडू में अपना आशियाना प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर ही बनाएंगे. जिससे न तो पर्यावरण को न ही प्रकति को नुकसान पहुचे. इसके लिए मारी व उनके पति धीरज दोनों ने फ्रांस में छुट्टियों में जाकर कई नैचरल बिल्डिंग प्रोजेक्ट विजिट किये ओर तकनीकों को समझा. जिसे फिर भारत आकर यहां आर्किटेक्ट सत्येंद्र भगत ओर अनंत नारायण ने इस सपने को साकार करने में जुट गए. मारी पिछले दो साल से अपने मकान को पूरा करने में लगी हुई है. जिसे देखने के लिए आसपास व अन्य प्रदेशों के पर्यटक भी आने लगे है. इन्हें खुशी है कि हमारे मकान को देखकर लोग प्रेरित होंगे और इस प्रकार से अपने मकान को बनाकर पर्यावरण और प्रकृति की सुरक्षा भी करेंगे.


वहीं धार के जिला कलेक्टर पंकज जैन ने कहा कि यह काफी अच्छी पहल है मांडू के पर्यटन मैं यह नवाचार आकर्षण का केंद्र बनेगा. जिला प्रशासन भी मांडू को प्रमोट करने के लिए लगातार प्रयासरत है. ऐसे प्रयोग पर्यटन के क्षेत्र में नई दिशा देंगे.