दतिया में उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने एक कदम और बढ़ाते हुए बीते शुक्रवार (15 मई) को दतिया कलेक्टर को पत्र लिखा. चुनाव आयोग का पत्र मिलने के तुरंत बाद दतिया कलेक्टर ने तत्परता दिखाते हुए. जिले के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर ईवीएम और वीवीपीएट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) में शामिल होने का आमंत्रण भेज दिया.
ईवीएम की एफएलसी इसी माह की आगमी 19 मई को होगी. दतिया विधानसभा में 291 मतदान केंद्रों के लिए 200 प्रतिशत मशीनों (लगभग 600-600-600) की तकनीकी जांच की जाएगी. पत्र के अनुसार, यह प्रक्रिया 19 मई 2026 से शुरू होगी.
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जिला निर्वाचन अधिकारी ने दिखाई तत्परता
दतिया कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने भी तत्परता दिखाते हुए, सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर एफएलसी में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया. पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए राजनीतिक दलों की सतर्क उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है.
जिला निर्वाचन अधिकारी ने पत्र के माध्यम से राजनीतिक दलों से मांगी जानकारी के अनुसार, अधिकृत प्रतिनिधि का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर तत्काल उपलब्ध कराना. प्रतिनिधि का पासपोर्ट साइज फोटो और वैध पहचान पत्र की प्रति 18 मई 2026 तक जमा करना और दल के राज्य स्तरीय कार्यालय की ई-मेल आईडी उपलब्ध कराना.
एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने तत्परता - राजेन्द्र भारती
दतिया में उपचुनाव की तैयारियों को लेकर पूर्व विधायक राजेंद्र भारती का कहना है कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए इतनी तत्परता दिखा रहा है. मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता तब तक चुनाव आयोग को इस तरह की कार्यवाही नहीं करनी चाहिए.
जानिये क्या है मामला और अब तक का घटनाक्रम
24 अगस्त 1998 राजेन्द्र भारती की मां सावित्री देवी श्याम के नाम (श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान ट्रस्ट) पर दतिया के जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) 3 वर्ष की अवधि और 13.5 फीसदी ब्याज दर पर की गई. तत्कालीन समय राजेन्द्र भारती बैंक के बोर्ड चेयरमैन थे. आरोप के अनुसार, एफडी की अवधि बढ़ाकर 10-15 वर्ष कर दी गई और दस्तावेजों में हेराफेरी कर मैच्योरिटी से पहले ही प्रतिवर्ष 1.35 लाख रुपये ब्याज सहित कुल लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध ब्याज निकाला गया.
29 जुलाई 2015 बैंक की शिकायत पर दतिया में केस दर्ज (धारा 200) हुआ और आरोपी सावित्री श्याम, राजेन्द्र भारती और बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति (कैशियर) को बनाया गया. 2015-2025 तक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली. इस दौरान राजेन्द्र भारती और आरोपी सावित्री श्याम का 2019 में निधन हो गया और उनकी मृत्यु के साथ ही उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई. गवाहों को धमकाने के आरोप के बाद अक्टूबर 2025 सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दिल्ली ट्रांसफर किया गया.
1 अप्रैल 2026 दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट (स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट, जज दिग्विजय सिंह) ने राजेन्द्र भारती और रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी करार दिया. धाराएं 120बी (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी) आईपीसी लगाई गई. 2 अप्रैल 2026 कोर्ट ने 3 साल की जेल 1 लाख रुपये जुर्माना (भारती पर) सुनाया.
रघुवीर शरण पर अलग जुर्माना
कोर्ट ने 60 दिन की अवधि दी अपील दायर करने के लिए (सजा पर स्टे नहीं, लेकिन अपील का समय दिया). 2-3 अप्रैल 2026 मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने आधी रात को नोटिफिकेशन जारी कर राजेन्द्र भारती की सदस्यता रद्द कर दी और दतिया विधानसभा सीट- 22 को रिक्त घोषित किया. यह रिप्रजेन्टेशन आफ द पीपल एक्ट- 1951 की धारा 8(3) और सुप्रीम कोर्ट के 10 जुलाई 2013 के आदेश के तहत स्वतः अयोग्यता पर आधारित था (2 वर्ष या अधिक सजा पर तुरंत अयोग्यता). 3 अप्रैल 2026 विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्रवाई की पुष्टि की.
वहीं, कांग्रेस ने जल्दबाजी और आधी रात की कार्रवाई पर आपत्ति जताई. अप्रैल 2026 भारती ने फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की. हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया. अप्रैल 2026 के मध्य भारती ने मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए भाजपा नेताओं (पूर्वगृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा) पर आरोप लगाए. उन्होंने 70 करोड़ रुपये के डील का भी दावा करते हुए कहा कि मेरा 100 ये 150 करोड़ का नुकसान हुआ लेकिन बीजेपी ने मुझे 70 करोड़ का ऑफर दिया. 28 अप्रैल 2026 दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई स्थगित (राहत नहीं मिली).
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