मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद इसपर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हुसैन दलवई ने कहा कि ये लोग इस तरह के मामलों के जरिए जानबूझकर मुसलमानों को परेशान कर रहे हैं. ऐसा करके ये लोग हिंदू-मुसलमान की राजनीति कर रहे हैं. 

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हुसैन दलवाई ने कोर्ट के फैसले पर कहा, "यह पूरी तरह से गलत है. पहले ही यह फैसला हो चुका था कि यह जगह जैसी है, वैसी ही रहेगी. चाहे वह कहीं भी हो और किसी भी रूप में क्यों न हो. अभी हर जगह इस तरह का फसाद खड़ा करना गलत है." 

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Dhar Bhojshala: हर शुक्रवार नमाज की इजाजत का आदेश रद्द, मस्जिद के लिए जमीन पर HC ने क्या कहा?

हुसैन दलवाई ने कहा- जानबूझकर मुसलमानों को प्रताड़ित करना सही नहीं

दलवाई ने आगे कहा, "बहुत सारे बौद्ध स्तूपों को ढहा दिया गया है, कई जैन मंदिर तोड़े गए है. बौद्धों को यहां से हटा दिया गया था. इसके बारे में आप क्या कहेंगे? उसकी भी जांच करें और उसे उन्हें वापस लौटाइए. जब अशोका का राज था वहां जो मूर्तीयां बनाई गईं वो बोद्धों की हैं. उसके बाद वहां शंकर की मूर्तीयां घुसाई गईं. इस तरह का जानबूझकर किया जाना सही नहीं है. आप दूसरा मंदिर बनाएं न क्या फर्क पड़ता है. जानबूझकर मुसलमानों को प्रताड़ित करना सही नहीं है. उनके खिलाफ खड़े रहना ताकि हिंदू-मुसलमान होता रहे जिससे उन्हें वोट मिलेगा. वो अपने पाप को छिपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं."

क्या है मामला?

दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में शुक्रवार (15 मई) को फैसला सुनाते हुए हिंदू समुदाय की दो जनहित याचिकाएं मंजूर कर लीं. कोर्ट ने इस मध्यकालीन स्मारक की धार्मिक प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर के तौर पर तय की. इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी.