झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं की जवाबदेही और जांच की मांग करते हुए छात्र 25 दिन तक प्रदर्शन करते रहे. इसका परिणाम यह हुआ कि हेमंत सोरेन सरकार को झुकना पड़ा और छात्रों की सबसे बड़ी मांग मान ली गई. झारखंड सरकार ने JSSC CGL की परीक्षा रद्द करने का ऐलान कर दिया. हालांकि, अपने इस फैसले से सरकार अब दोराहे पर आकर खड़ी होने को मजबूर है, क्योंकि अब एग्जाम पास कर एक साल से नौकरी कर रहे उम्मीदवार नाराज हो गए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.

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JSSC CGL पास कर चुके उम्मीदवारों का कहना है कि कुछ लोगों के भ्रष्टाचार की वजह से सरकार सभी का एग्जाम कैंसिल कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों कर रही है? उनका कहना है कि वह हर तरीके से जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन एग्जाम रद्द कर देना सही फैसला नहीं है.

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निर्दोषों के साथ अन्याय कर रही है झारखंड सरकार

दरअसल, JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार, परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हम लोग हर तरह के जांच के लिए तैयार हैं. आप जांच कीजिए. जो गलत है उस पर कार्रवाई कीजिए लेकिन कुछ लोगों के लिए हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए. मैं जांच करवाने के लिए तैयार हूं. आप जो बोलिएगा मैं अपने सारे दस्तावेज लेकर आया हूं. आप CBI जांच कीजिए, लेकिन परीक्षा कैंसिल कर के हमारे साथ अन्याय मत कीजिए, हम लोग मर जाएंगे."

सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का विरोध कर रहे दूसरे प्रदर्शनकारी का कहना है कि जब हम एक निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए शामिल हुए थे तो फिर ऐसा कदम क्यों उठाया जा रहा है? हमारा कहना है कि आप जांच करवाइए. जांच में जो गड़बड़ मिलेगा, उसे हटाइए न, हम लोग आपसे सहमत हैं. हम आपका समर्थन कर रहे हैं.

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