Jharkhand News: यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बीजेपी (BJP) नेता ने आदिवासी पर पेशाब किए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों का गुस्सा फूटा है. बैनर-पोस्टर और तख्तियों के साथ नारेबाजी करते हुए शनिवार को कुछ आदिवासी संगठनों के लोग झारखंड प्रदेश बीजेपी कार्यालय घेरने पहुंचे, लेकिन कड़ी सुरक्षा के बीच हरमू मैदान से चले इन प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आधे रास्ते में ही रोक दिया. इस दौरान हरमू राजपथ पर जाम लगा गया. इस घेराव को लेकर केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि, यूसीसी के जरिए हमारा संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है. मध्य प्रदेश में बीजेपी नेता ने आदिवासी युवक पर पेशाब किया है, इसका जवाब चुनाव में दिया जाएगा.
वहीं आदिवासी जन परिषद के प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि, बीजेपी लोकतंत्र की हत्या कर रही है. लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि, बीजेपी के एजेंडे को आदिवासी समाज को समझना होगा. आदिवासी मूलवासी जन अधिकार मंच के उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कहा कि, आने वाले समय में आदिवासी समाज को संघर्ष करने के लिए तैयार रहना होगा. आदिवासी सेना के एलविन लकड़ा सहित लगभग सभी एसटी नेताओं ने बीजेपी पर संविधान को खत्म करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि, ऐसी परिस्थिति में संघर्ष जारी रखना होगा. घेराव में डबलू मुंडा, विकास तिर्की, कुमुदिनी तिर्की, अभय भुटकुंवर, प्रकाश मुंडा, कुंदरसी मुंडा, रूपचंद केवट, रंजीत टोप्पो, प्रकाश हंस, एमआर मांझी आदि शामिल थे.
क्या बोले बाबूलाल मरांडी प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने घेराव को सरकार प्रायोजित बताया. उन्होंने कहा कि, हेमंत सरकार के इशारे पर कतिपय आदिवासी संगठन जनजातियों की हितैषी बनने का ढोंग कर रही हैं. यदि सचमुच इन्हें आदिवासियों की नृशंस हत्या, हजारों आदिवासी बहन-बेटियों से हुए रेप का दर्द है, तो वे सीएम हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करें. क्योंकि, हेमंत राज में सबसे ज्यादा आदिवासियों को ही प्रताड़ित किया गया है. इनमें चाईबासा में आदिवासियों का नरसंहार, आदिवासी दारोगा रूपा तिर्की की हत्या, पशु तस्करों द्वारा दारोगा संध्या टोपनो की हत्या, सिदो-कान्हो के वंशज रामेश्वर मुर्मू की हत्या हेमंत सरकार में हुई है. रुबिका पहाड़िया को टुकड़ों-टुकड़ों में काटकर हत्या की गई. मांडर में आदिवासी छात्रा से कार में गैंग रेप हुआ. हेमंत सरकार में 5500 से अधिक बहन-बेटियों से बलात्कार की घटनाएं घटी हैं. इनमें अधिकतर आदिवासी-दलित बेटियां हैं.
