झारखंड के रामगढ़ जिले में बरकाकाना थाना क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में शुक्रवार देर रात ब्वॉयलर ब्लास्ट हो जाने में तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल को बेहतर इलाज के लिए रांची रोड स्थित द हॉप हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. 

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मृतकों की पहचान रांची निवासी और फैक्ट्री के शिफ्ट इंचार्ज संजीव कुमार केसरी (50), बोकारो के जागेश्वर विहार निवासी विनीत महतो (25) और गढ़वा के नगर उंटारी निवासी अभिषेक पांडेय (24) के रूप में हुई है. घायल कर्मचारी की पहचान हजारीबाग निवासी तरुण रजवार के रूप में हुई है. बताया गया कि पावर प्लांट में काम के दौरान अचानक तेज धमाका हुआ. हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई. 

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घटना में तीन इंजीनियरों की मौत

घटना की सूचना मिलने के बाद बरकाकाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली.बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने के दौरान तीन कर्मियों की मौत हुई है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है. बेहतर इलाज के लिए घायल को रांची भेजा गया है. 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पावर प्लांट के सिस्टम में अत्यधिक तापमान बढ़ने के बाद तकनीकी गड़बड़ी हुई. इसके बाद प्रोटेक्शन सिस्टम के काम नहीं करने और टर्बाइन के ओवरस्पीड होने की वजह से ब्लास्ट होने की बात सामने आ रही है. हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

इंजीनियरों की मौत पर फैक्ट्री कर्मचारियों में आक्रोश

हादसे के बाद फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों में आक्रोश है. कर्मचारियों ने प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. कर्मचारियों का कहना है कि पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में पिछले कुछ समय से तापमान लगातार बढ़ रहा था. कंट्रोल रूम का एसी खराब होने के कारण वहां काम करना मुश्किल हो गया था.

कर्मचारियों के अनुसार, इसकी जानकारी कई बार प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को दी गई थी. तापमान की निगरानी के लिए टेंपरेचर गन से लगातार रीडिंग ली जाती थी और इसकी जानकारी भी प्रबंधन को दी जाती थी. इसके बावजूद कूलिंग व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया. 

कर्मचारियों का आरोप है कि यदि समय रहते कंट्रोल रूम की कूलिंग व्यवस्था ठीक कर दी जाती और सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू किया जाता, तो हादसे को टाला जा सकता था. हादसे के बाद कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही मृत इंजीनियरों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और घायल कर्मचारी के बेहतर इलाज की मांग की गई है.

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