जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई. अब्दुल्ला ने इस बात पर घोर हैरानी व्यक्त की कि वांगचुक पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनका 9 किलो वजन कम हो चुका है, इसके बावजूद सरकार ने अब तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें नहीं पता कि सरकार आगे क्या कदम उठाएगी लेकिन हम सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर सचमुच चिंतित हैं. उनकी मांगें अनुचित नहीं हैं, फिर भी सरकार उन्हें लेकर गंभीर नहीं दिखती."
अन्ना हजारे के आंदोलन और UPA सरकार की दिलाई याद
केंद्र सरकार को घेरते हुए उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए अन्ना हजारे के ऐतिहासिक अनशन का भी जिक्र किया. उन्होंने तत्कालीन यूपीए (UPA) सरकार के काम करने के तरीके की याद दिलाते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने अन्ना हजारे के अनशन को गंभीरता से लिया था. उस समय सरकार ने अपने मंत्रियों को विशेष रूप से हजारे से बातचीत करने और उन्हें अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाने का जिम्मा सौंपा था. सीएम अब्दुल्ला का इशारा स्पष्ट था कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे लोगों से संवाद करने में विफल साबित हो रही है.
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'यहां आकर राजनीति न करें'
सोनम वांगचुक के मुद्दे के अलावा, उमर अब्दुल्ला ने अपने चाचा डॉ. मुस्तफ़ा कमाल के निधन के बाद सांत्वना देने आ रहे कुछ राजनीतिक नेताओं पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता शोक व्यक्त करने तो आते हैं, लेकिन बाहर जाकर इस पर भी राजनीति चमकाते हैं. कड़े शब्दों में नसीहत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जो लोग यहां संवेदना जताने आते हैं, उन्हें बाहर जाकर राजनीति नहीं करनी चाहिए. अगर उन्हें राजनीति ही करनी है, तो उन्हें यहां आने की कोई ज़रूरत नहीं है."
