भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) को बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर हटाने के निर्देश पर सियासी बयानबाजी तेज है. इस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार (6 जनवरी) को प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम खेल को सिर्फ खेल की तरह देखते हैं. आप ये सवाल उन लोगों से पूछिए जो खेल को सियासत के साथ जोड़ते हैं. जब वे किसी टीम को देखते हैं तो वे खिलाड़ियों के धर्म पर ध्यान देते हैं. धर्म के अलावा उन्हें कुछ और नहीं दिखता है. जब फुटबॉल टीम में मुसलमान खिलाड़ी ज्यादा थे तो उन्हें फुटबॉल टीम से ऐतराज था.
सीएम ने कहा, 'जब क्रिकेट टीम में मुसलमान खिलाड़ियों की संख्या कम हो गई तो उन्हें क्रिकेट टीम से कोई ऐतराज नहीं रहा. हर चीज में कुछ लोग हमेशा मजहब को लाते हैं. वे शिक्षा और खेलकूद में मजहब लाते हैं. खाने-पीने में तो उन्होंने हद ही कर दी है. ऐसे में अब बचा ही क्या है? जब उनका कोई मुद्दा नहीं चला तो जम्मू को अलग करने में लगे हुए हैं.'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सीएम ने कहा, 'बजट को लेकर मैं अभी कुछ नहीं कह सकता हूं. बजट में क्या होगा, क्या नहीं होगा, किन चीजों का जिक्र होगा और किन चीजों का जिक्र नहीं होगा, उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता हूं. जाहिर सी बात है कि बजट तैयार होने के बाद सबसे पहले सदन में पेश होगा.'
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'हम हर तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हालात बदलते हैं. राज्य का दर्जा वापस पाना एक चुनौती है, आने वाला बजट सत्र एक चुनौती है, और टूरिज्म सीजन की सफलता एक चुनौती है. उन्होंने लद्दाख को एक अलग यूटी बनाकर उसे बर्बाद कर दिया है.मुख्यमंत्री ने कहा, अब अगर वे इसी तरह जम्मू को बर्बाद करना चाहते हैं तो वे जम्मू का एक अलग राज्य बना सकते हैं. वे लद्दाख को संभाल नहीं पाए. वे जम्मू को राज्य का दर्जा देने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनका प्रशासन फेल हो गया है. क्या वे धर्म के आधार पर जम्मू को एक राज्य बनाना चाहते हैं?'