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कश्मीर घाटी, जिसे दुनिया का स्वर्ग कहा जाता है, इस वक्त एक बेहद चिंताजनक मौसमी बदलाव की चपेट में है. एक तरफ गुलमर्ग और पहलगाम की बर्फ पर्यटकों को लुभा रही है, तो दूसरी तरफ घाटी की जमीनी हकीकत डराने वाली है. आंकड़े बताते हैं कि इस साल सर्दियों में 65% कम बर्फबारी हुई है, जिसने कश्मीर की आबोहवा और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 12 जनवरी 2021 को श्रीनगर की डल झील पूरी तरह जम चुकी थी और लोग उसकी बर्फ पर चलते हुए फोटो खिंचवा रहे थे. लेकिन आज 6 जनवरी 2026 को नजारा बिल्कुल अलग है. श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जो सामान्य से 8 डिग्री ज्यादा है. रात में पारा -4 डिग्री होने के बावजूद दिन की तेज धूप झील को जमने नहीं दे रही.

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सूखते जल स्रोत: अरिपाल झरने ने तोड़ा दम

घाटी के जल स्रोत अब जवाब देने लगे हैं त्राल (पुलवामा) का प्रसिद्ध अरिपाल प्राकृतिक झरना पूरी तरह सूख गया है. पिछले 3 साल में यह दूसरी बार है जब यह सदाबहार झरना सूखा है. श्रीनगर का 'धारा' गाँव से बहने वाला नाला शहर की प्यास बुझाता है, लेकिन अब यह भी सूखने की कगार पर है. अगर जनवरी में बर्फ नहीं गिरी, तो गर्मियों में पीने के पानी का हाहाकार मच सकता है.

सेब के बागानों और खेती पर संकट

कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले Horticulture (बागवानी) पर संकट के बादल हैं. बारिश और बर्फ की कमी से सेब और अन्य मेवों के पेड़ सूखने लगे हैं. बागवानों का कहना है कि अगर मिट्टी को पर्याप्त नमी नहीं मिली, तो इस साल पैदावार आधी रह जाएगी.

जंगल और जंगली जानवर: बढ़ता खतरा

दाचीगाम नेशनल पार्क के पास बर्फबारी न होने से जंगली जानवरों का रास्ता साफ हो गया है, जिससे वे रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. वहीं, सूखे मौसम के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ गया है.

मौसम विभाग की भविष्यवाणी: 'ड्राई स्पेल' जारी रहेगा

श्रीनगर मौसम विभाग के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद के मुताबिक, "मैदानी इलाकों में दिन में तेज धूप और रातें सर्द बनी रहेंगी. फिलहाल 20 जनवरी तक भारी बर्फबारी की कोई संभावना नहीं है. कश्मीर में सूखे (Dry Spell) के हालात अभी और गंभीर हो सकते हैं."

बड़ी चिंता

सर्दियों में बर्फ का न गिरना सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह गर्मियों के लिए पानी की किल्लत, बिजली उत्पादन में कमी और खेती की बर्बादी का संकेत है. जहां सैलानी 'धूप वाले कश्मीर' का आनंद ले रहे हैं, वहीं स्थानीय लोग आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब 'चिल्लई कलां' अपनी असली रंगत दिखाए और घाटी सफेद चादर से ढक जाए.