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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर 'राज्य के दर्जे' और 'अखंडता' को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. जम्मू-कश्मीर के कैबिनेट मंत्री जावेद राणा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उन नेताओं पर तीखा प्रहार किया है जो जम्मू को एक अलग राज्य बनाने की वकालत कर रहे हैं. राणा ने विश्वास जताया कि भविष्य में न केवल अनुच्छेद 370 की बहाली होगी, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया लद्दाख भी फिर से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बनेगा.

पत्रकारों से बातचीत करते हुए जावेद राणा ने बीजेपी नेताओं के दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जम्मू को अलग राज्य बनाने की बातें पूरी तरह से काल्पनिक और जनता को गुमराह करने वाली हैं. राणा के अनुसार, केंद्र सरकार के पास अंततः एक एकजुट और अखंड जम्मू-कश्मीर को बहाल करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि एक एकजुट प्रदेश न केवल राजनीतिक रूप से जरूरी है, बल्कि यह क्षेत्र के भविष्य के लिए अनिवार्य भी है.

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क्षेत्रीय पहचान और एकजुटता का हवाला

मंत्री ने स्पष्ट किया कि अलग जम्मू राज्य की मांग जनभावना नहीं, बल्कि केवल बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा है. उन्होंने कहा, "बीजेपी नेताओं के अलावा किसी और की तरफ से ऐसी कोई मांग नहीं है. पीर पंजाल और चिनाब क्षेत्र के लोगों ने कभी बंटवारे की बात नहीं की. इन इलाकों के लोग एक एकजुट जम्मू-कश्मीर के साथ ही अपनी पहचान देखते हैं."

ऐतिहासिक विरासत की बहाली का दावा

ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए जावेद राणा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर कभी एक विशाल और पूर्ण राज्य था. इसके कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान और चीन ने अवैध कब्जा कर लिया, जबकि लद्दाख को बाद में प्रशासनिक रूप से अलग कर दिया गया. उन्होंने भावुक और रणनीतिक लहजे में कहा कि इतिहास और जमीनी हकीकत को हमेशा के लिए बदला नहीं जा सकता. राजनीतिक परिस्थितियां निश्चित रूप से बदलेंगी और लद्दाख एक बार फिर अपनी पुरानी जड़ों यानी जम्मू-कश्मीर में वापस लौटेगा.

राणा ने अपने संबोधन का अंत इस भरोसे के साथ किया कि लोगों के बीच एकता की आकांक्षा और एक अखंड पहचान की जीत अंततः सुनिश्चित है. उनके इस बयान के बाद राज्य में एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है.