जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 अगस्त 2026 को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और परेड की सलामी ली. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के हालात का जिक्र किया.

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार के हालात को देखकर उन्हें महसूस होता है कि 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ रहने का फैसला सही था. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उस समय “हमलावर खबरदार” का नारा दिया था, उनका निर्णय सही था और उनके बलिदान व्यर्थ नहीं गए.

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शहीदों को श्रद्धांजलि देकर किया संबोधन

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर स्थित बलिदान स्तंभ पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को नमन किया. इसके बाद बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने तिरंगा फहराया और परेड का निरीक्षण किया. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 1947 के दौर को याद करते हुए कहा कि जब पाकिस्तानी फौज और कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया था, तब भारतीय सेना के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने उनका मुकाबला किया था.

‘हमलावर खबरदार’ नारे का किया जिक्र

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उस समय कश्मीर की गलियों में “हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार” का नारा गूंजता था. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास हथियार थे, उन्होंने बंदूक उठाई और जिनके पास हथियार नहीं थे, उन्होंने लकड़ी की नकली बंदूकों तक से मुकाबला किया. उन्होंने कहा कि उन लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर जम्मू-कश्मीर की रक्षा की और उनका संघर्ष इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

PoJK के हालात पर जताई चिंता

मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की घटनाएं यह साबित करती हैं कि 1947 में लिया गया फैसला सही था. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा भी उनका है और वहां रहने वाले लोगों को वे अपना मानते हैं. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoJK के लिए सीटें आरक्षित हैं और उम्मीद है कि भविष्य में वहां के प्रतिनिधि इन सीटों पर बैठ सकेंगे. उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि हर परिस्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है.

स्वतंत्रता दिवस पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए श्रीनगर समेत पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई. बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की सुरक्षा की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई थी. सुरक्षा बलों ने समारोह स्थल और आसपास के इलाकों में विशेष निगरानी रखी, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

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