जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले समेत कई मुद्दों पर चर्चा की. एलजी सिन्हा ने हमले को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पहलगाम में जहां आतंकी हमला हुआ, वहां तीन दिन पहले ही लोग जाना शुरू हुए, वहां उन्हें जाने की अधिकृत रूप से इजाजत भी नहीं थी.

उन्होंने माना कि पहलगाम आतंकी हमले की घटना के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में कमी आई है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी बेगुनाह को छेड़ेंगे नहीं और किसी गुनाहगार को हम छोड़ेंगे नहीं. 

उन्होंने कहा, ''हम पर्यटन स्थलों को धीरे-धीरे खोल रहे हैं. समीक्षा के बाद बैसरन घाटी को खोला जाएगा. उन्होंने ये भी बताया कि हमले से महज तीन दिन पहले ही बैसरन घाटी खुली थी. पहलगाम के आतंकी जरूर मिलेंगे, उनकी पहचान हो गई है.''

आतंकवादी हमले के पीड़ितों को नियुक्ति पत्र देने पर क्या बोले LG?

जब उनसे पूछा गया कि बारामूला में जाकर आतंकवादी हमले के पीड़ितों को नियुक्ति पत्र बांटे. लोग पूछेंगे की इसमें इतने साल क्यों लग गए? इस सवाल पर एलजी ने कहा, ''यहां सरकारी कानून है. जिनकी मृत्यु आतंकवादी हिंसा में हुई उनके परिवार को सरकारी नौकरी दी जाती है. गृहमंत्रालय की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाती है. अभी पुंछ या बाकी जगहों पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शेलिंग हुई, उसमें जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनको भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आकर नियुक्ति पत्र दिया था.'' 

बुलडोजर एक्शन पर LG मनोज सिन्हा ने क्या कहा?

जब उनसे पूछा गया कि कश्मीर के कई हिस्सों में बुलडोजर की कार्रवाई भी की गई. कुछ घरों को गिरा दिया गया ये कहते हुए कि उनके बच्चे आतंकवादियों को समर्थन देते थे और उनकी गतिविधियां बहुत संदिग्ध पाई गईं. इस पर उपराज्यपाल ने कहा, ''कुछ लोग हैं जो आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, हालांकि उनकी संख्या बड़ी कम हो गई है. मैं समझता हूं कि वो भी आने वाले दिनों में समाप्त हो जाएगी. लेकिन एक नीति भारत सरकार के नेतृत्व में थी कि हम शांति खरीदना नहीं चाहते हैं, हम शांति स्थापित करना चाहते हैं. हम उसी पर आगे बढ़े.

किसी निर्दोष के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं- LG

उन्होंने ये भी कहा कि हम एक बात बार-बार कहते हैं कि किसी बेगुनाह को छेड़ो मत और किसी गुनहगार को छोड़ो मत. किसी बेगुनाह का घर गिरा है तो आप बता दीजिए, सारी जिम्मेदारी मैं ले लूंगा. वे लोग आतंकी वारदातों में सक्रिय रूप से शामिल थे, जिन आप कह सकते हैं कि वो प्योर आतंकवादी थे, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई हुई है. किसी निर्दोष के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं हुई है. 

सुरक्षा को लेकर LG ने क्या कहा?

पहलगाम हमले जैसी घटना दोबारा ना हो, उसके लिए क्या तैयारी है? बीच में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कम कर दी गई थी, सेना के लोग आम तौर पर सड़कों पर नहीं दिखाई देते थे. अब उनमें इजाफा हो गया है. क्या इसे लेकर कोई खास रणनीति बनाई गई है? इस सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा, ''मुझे लगता है इजाफा नहीं हुआ है. सुरक्षा की एक रणनीति बनती है. यूनिफाइड कमांड की मीटिंग या बाकी सिक्योरिटी रिव्यूज होते हैं, उसके हिसाब से काम किया जाता है. अभी अमरनाथ जी की यात्रा चल रही है. तीन स्तरीय सुरक्षा का इंतजाम किया गया है.''