Jammu Kashmir Domicile Certificate: विवादास्पद वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर बुधवार को भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा हुआ. इस बीच प्रश्नकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण खुलासे ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल सर्टिफिकेट को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. यहां

35 लाख से अधिक लोगों को निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल सर्टिफिकेट) दिया गया है. इनमें से 83 हजार से अधिक बाहरी लोगों को जम्मू-कश्मीर में निवासियों का दर्जा दिया गया है.

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?

इसको लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसको लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा है.

उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर के मूल इलाके के अधिकार पर हमला बहुत पहले से शुरू हुआ है और इतनी बड़ी संख्या में बाहर से आए लोगों को प्रमाण पत्र हासिल करना एक चिंता की बात है.''

जम्मू-कश्मीर सरकार ने कहा है कि पिछले दो वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में नॉन लोकल को 83,742 डोमिसाइल सर्टिफिकेट पत्र दिए गए हैं. जम्मू-कश्मीर में देश के बाकी हिस्सों से आए लोगों के रहने, प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरी के लिए यह प्रमाण पत्र जरूरी है.

कैसे आकंड़े आए सामने?

पीडीपी के विधायक वहीद उर रहमान पारा ने सरकार से सवाल किया था कि पिछले दो सालों में कितने बाहरी लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया. इसके जवाब में सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दो वर्षों में 35,12,184 डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया है. इनमें 83,742 बाहरी हैं.

सवाल और जवाब की कॉपी पारा ने एक्स पर पोस्ट की है. उन्होंने लिखा, ''इसकी जांच क्यों नहीं की जा रही है?''

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्वामित्व, प्रवेश और संपत्ति खरीदने के लिए निवास प्रमाण पत्र आवश्यक हैं.

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