केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सोमवार (19 जनवरी) को बैठक हुई. इस बैठक में दोनों नेताओं ने केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में बैठक हुई. 

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दोनों नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों, विशेषकर व्यापारियों और छात्रों पर हुए हमलों, आगामी बजट, अन्य राज्यों की जेलों में केंद्र शासित प्रदेश के कैदियों की स्थिति और अन्य मुद्दों पर चर्चा की.

सरकार और प्रशासन के बीच चल रहे तनाव पर हुई बैठक

बताया जा रहा है कि उमर अब्दुल्ला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच यह बैठक जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के प्रशासन को लेकर बढ़ते तनाव के बीच हुई. सरकार और प्रशासन के बीच व्यापार संचालन नियमों को लेकर किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है. 

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सीएम ने पोस्ट में दी यह जानकारी

उमर अब्दुल्ला के ऑफिस की ओर से 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि सीएम ने सोमवार (19 जनवरी) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की. यह बैठक हाल ही में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं के साथ मारपीट की घटनाओं के बीच हुई है. 

बता दें कि फरवरी में जम्मू-कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र शुरू होगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निधि आवंटन किया जाता है क्योंकि गृह मंत्रालय आवंटन का नोडल मंत्रालय है. 

उमर अब्दुल्ला ने लगाए आरोप

हाल ही में उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र सरकार विकास से जुड़ा खर्च, योजनाओं के वित्तपोषण और विस्तार के मामले में सकारात्मक रवैया रखती है, लेकिन उपराज्यपाल के कार्यालय के साथ संबंध तनावपूर्ण रहे हैं.

उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाते हुए कहा कि उपराज्यपाल ने चुनी हुई सरकार को सूचना विभाग के नियंत्रण से वंचित रखने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के लिए आरक्षित पद पर एक आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया है. 

'सीएम के दफ्तर के शक्तिहीन होने के बारे में मुखर रहे हैं'

उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के दफ्तर के शक्तिहीन होने के बारे में मुखर रहे हैं. सीएम का कहना है कि उन्हें देश के सबसे सशक्त राज्यों में से एक का नेतृत्व करने के बजाय एक ऐसे केंद्र शासित प्रदेश का नेतृत्व करने का अद्वितीय दुर्भाग्य मिला है. जिसके पास किसी भी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री की तुलना में बहुत कम शक्ति है.

बीते दिनों मीडिया से बातचीत करते हुए उमर अब्दुल्ला ने एलजी ऑफिस द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक हस्तक्षेप का जिक्र किया. सीएम ने कानून और सुरक्षा व्यवस्था से असंबंधित विभागों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है.