जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मंत्रिपरिषद के लंबे समय से इंतजार किए जा रहे विस्तार को लेकर तस्वीर अब साफ हो गई है. मुख्यमंत्री ने पुष्टि की है कि कैबिनेट का विस्तार 15 अगस्त के बाद किया जाएगा. श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विस्तार होगा, लेकिन स्वतंत्रता दिवस से पहले ऐसा नहीं किया जाएगा.

Continues below advertisement

कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "यह करेंगे, लेकिन 15 अगस्त से पहले नहीं,". उनके इस बयान के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है.

बताया जा रहा है कि आगामी विस्तार में तीन नए मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक यह संख्या 5 तक भी पहुंच सकती है, क्योंकि मौजूदा मंत्रिपरिषद से दो मंत्रियों को हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है.

Continues below advertisement

PoK में तनाव के बीच जम्मू जाएंंगे आर्मी चीफ, सीमावर्ती इलाकों का लेंगे जायजा

मौजूदा मंत्रियों पर भी फैसला संभव

मंत्रियों को हटाए जाने की संभावना पर मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ऐसा पहले करना उन मौजूदा मंत्रियों के साथ अन्याय होगा, जिन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोहों में भाषण देना है.

कैबिनेट विस्तार को सैद्धांतिक तौर पर अंतिम रूप दिए जाने की बात सामने आ रही है. हालांकि, अभी विस्तार की तारीख, नए मंत्रियों के नाम और उन्हें मिलने वाले विभागों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. औपचारिक घोषणा से पहले मुख्यमंत्री सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे.

9 मंत्रियों तक हो सकती है कैबिनेट

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत केंद्र शासित प्रदेश की मंत्रिपरिषद विधानसभा की कुल 90 सीटों के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती. इसके हिसाब से मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 9 मंत्री मंत्रिपरिषद में रह सकते हैं.

फिलहाल उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट में 6 सदस्य हैं. इनमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, मंत्री सकीना इटू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा शामिल हैं.

जम्मू कश्मीर: उद्धव गुट ने श्राइन बोर्ड से मांगा 10 साल का हिसाब, राम मंदिर का किया जिक्र

ऐसे में कानूनी सीमा तक पहुंचने के लिए तीन मंत्री पद खाली हैं. माना जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद होने वाले विस्तार में इन पदों को भरा जा सकता है. इसका मकसद सरकार में बेहतर क्षेत्रीय और गठबंधन प्रतिनिधित्व देना और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना है.