जम्मू और कश्मीर में 100 दिनों का 'नशा मुक्त जम्मू और कश्मीर' अभियान, जिसकी अगुवाई उपराज्यपाल मनोज सिन्हा कर रहे हैं, अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है. जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन पूरी दृढ़ता के साथ पूरे ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य 100 दिनों के भीतर इस क्षेत्र को नशा मुक्त बनाना है.

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इस पहल को अब और भी ज्यादा बल मिला है, क्योंकि धार्मिक विद्वान भी इस नशा मुक्त अभियान के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं. जम्मू और कश्मीर के मुफ्ती-ए-आजम नासिर-उल-इस्लाम ने इस संबंध में एक 'फतवा' जारी किया है. मुफ्ती-ए-आजम ने कहा कि हमारे समाज में नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रकोप केवल एक सामाजिक बुराई ही नहीं है, बल्कि यह नैतिक और आध्यात्मिक पतन का भी एक कारण है.

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मुफ्ती नासिर ने जारी किया फतवा

मुफ्ती नासिर ने आगे कहा कि मैं इसके द्वारा एक स्पष्ट धार्मिक आदेश (शरीयत का फैसला) जारी करता हूं. उन्होंने कहा कि इस्लामी कानून के नजरिए से नशीले पदार्थों के व्यापार चाहे वह खरीदना हो या बेचना उससे होने वाली कमाई को 'हराम' (वर्जित) और 'अपवित्र' माना जाएगा.

मुफ्ती-ए-आजम ने नशीले पदार्थों के खिलाफ जारी अपने 'फतवे' (धार्मिक आदेश) में ड्रग व्यापार से होने वाली किसी भी कमाई को 'हराम' (वर्जित) घोषित किया है. उन्होंने कहा है कि इस कमाई का इस्तेमाल किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक कार्य में, या किसी अन्य नेक काम यहां तक कि दान के रूप में भी नहीं किया जा सकता.

जहां एक ओर 'नशा मुक्त जम्मू और कश्मीर' अभियान में स्थानीय निवासियों की बड़े पैमाने पर भागीदारी देखने को मिल रही है. वहीं जम्मू और कश्मीर के मुफ्ती-ए-आजम नासिर-उल-इस्लाम द्वारा जारी किए गए फतवे ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान को और भी ज्यादा मजबूत बना दिया है.

वकीलों से की तस्करों का केस न लड़ने की अपील

अपने जारी किए गए वीडियो बयान में मुफ्ती-ए-आजम ने इस बात को दोहराते हुए कि नशीले पदार्थों से होने वाली कमाई 'हराम' है. वकीलों से भी अपील की है कि वे अदालत में ड्रग तस्करों का केस न लड़ें. ऐसा करके वे इस व्यापार में शामिल सभी ड्रग पेडलर्स और तस्करों को एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं.

सरकार के पास ऐसे कई आंकड़े मौजूद हैं, जो इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि जम्मू और कश्मीर पुलिस तथा प्रशासन जनता के सहयोग से 'नशीले पदार्थों के प्रति जीरो टॉलरेंस' की नीति को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं. इस नीति का उद्देश्य ड्रग्स की पूरी सप्लाई चेन को पूरी तरह से खत्म करना है.

इस अभियान के एक हिस्से के तौर पर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा स्वयं अब तक तीन बड़ी पदयात्राओं (पैदल मार्च) का नेतृत्व कर चुके हैं. उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र के तहत, जम्मू और कश्मीर पुलिस को ड्रग तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की पूरी आजादी दी गई है.

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