नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हुए हालिया जानलेवा हमले के बाद, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने अपनी सुरक्षा की तत्काल समीक्षा करते हुए जैमर और नई बुलेट-प्रूफ (BP) गाड़ियों की मांग की है. उपमुख्यमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों के ढुलमुल और "गैर-गंभीर" रवैये पर भी गहरी नाराजगी जताई है.

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बुधवार (11 मार्च) को जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान फारूक अब्दुल्ला पर बहुत करीब से गोली चलाने की कोशिश की गई थी. इस घटना में 63 वर्षीय आरोपी कमल सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था. घटना के वक्त उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी वहीं मौजूद थे और वीवीआईपी (फारूक अब्दुल्ला) के काफी करीब थे. इसी दुखद घटना और मौजूदा सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए चौधरी ने अपनी सुरक्षा कड़ी करने की मांग की है.

6 महीने से गायब है जैमर गाड़ी, मौजूदा गाड़ियां हैं खस्ताहाल

उपमुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि लगभग छह महीने पहले मरम्मत के नाम पर उनके काफिले से एक जैमर गाड़ी हटाई गई थी, जो आज तक वापस नहीं आई है. उनके विशेष कार्य अधिकारी (OSD) ने जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) को पत्र लिखकर बताया कि 13 मार्च को एक बुलेट-प्रूफ फॉर्च्यूनर की मांग की गई थी. यह गाड़ी 15 मार्च से सीमावर्ती क्षेत्र नौशेरा विधानसभा के दौरे के लिए मांगी गई थी, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है.

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पत्र में इस बात का भी प्रमुखता से जिक्र है कि काफिले में फिलहाल जो बुलेट-प्रूफ, पायलट और स्काउट गाड़ियां तैनात हैं, वे तकनीकी रूप से बिल्कुल भी भरोसेमंद नहीं हैं. हाल ही में इन खस्ताहाल गाड़ियों की वजह से कई गंभीर और जानलेवा हादसे होते-होते बचे हैं. बार-बार अनुरोध के बावजूद सुरक्षा विभाग द्वारा कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है.

"सुरक्षा बढ़ाएं या पूरी तरह हटा लें"

राजौरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुरिंदर चौधरी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था तय करना पुलिस और सुरक्षा विभाग का काम है. उन्होंने कहा, "अगर अधिकारियों को खतरे के आकलन के आधार पर लगता है कि मेरी सुरक्षा अपग्रेड करने की जरूरत है, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए. और अगर नहीं, तो वे मौजूदा सुरक्षा भी हटा सकते हैं."

अब्दुल्ला पर हुए हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि गोलियां किसी का धर्म या ओहदा नहीं देखतीं, वह किसी को भी लग सकती हैं. उनका कहना था कि उन्हें जनता के लिए काम करने के लिए चुना गया है, न कि अपनी निजी सुरक्षा व्यवस्था की चिंता करने के लिए.

पत्र के अंत में चेतावनी दी गई है कि जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा हालात और उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारियों की प्रकृति को देखते हुए—जिसके तहत उन्हें अक्सर दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों का दौरा करना पड़ता है—पूरी और भरोसेमंद सुरक्षा के बिना उनका आना-जाना एक बड़ा जोखिम पैदा करता है.