लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) लागू करने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है. इन मांगों के समर्थन में लेह और कारगिल जिलों में भारी विरोध प्रदर्शन किए गए.
गृह मंत्रालय (MHA) के साथ बातचीत में हो रही देरी को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है, जिसके चलते लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने इस विशाल विरोध मार्च का आह्वान किया था.
लेह में शांतिपूर्ण महारैली
लद्दाख के लोगों को संवैधानिक सुरक्षा उपाय दिलाने के लिए लेह में एक विशाल और शांतिपूर्ण रैली निकाली गई. लेह एपेक्स बॉडी के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया.
यह रैली सिंगे नामग्याल चौक से शुरू होकर लेह पोलो ग्राउंड तक गई. रैली में विभिन्न धर्मों और समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जो लद्दाख की एकजुटता को दर्शा रहा था. प्रदर्शनकारी हाथों में पर्चे और तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर लद्दाख के लिए छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांगें लिखी थीं.
कारगिल और द्रास में पूर्ण 'बंद'
KDA और एपेक्स बॉडी के आह्वान पर कारगिल जिले में पूरी तरह से बंद (Bandh) रखा गया. यहां भी हजारों लोगों ने सड़क पर उतरकर एक विशाल विरोध मार्च निकाला. कारगिल के साथ-साथ द्रास उप-मंडल में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला.
KDA के सदस्य सज्जाद कारगिली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पिछले छह वर्षों से, लद्दाख के लोग लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से वंचित रहे हैं. न्याय, अधिकारों और लोकतंत्र की बहाली के लिए पहाड़ों से उठने वाली आवाज़ें अब और भी बुलंद होती जा रही हैं."
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात
हालात को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए लेह और कारगिल दोनों जिलों में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. लद्दाख पुलिस के महानिदेशक (DGP) मुकेश सिंह स्वयं लेह में मौजूद रहकर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं.
