जम्मू-कश्मीर में आगामी अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को सुरक्षित और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बलों ने पूरी तरह से कमर कस ली है. यात्रा शुरू होने से पहले ही सुरक्षा बलों ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे और इससे सटे सभी संवेदनशील इलाकों को अपने नियंत्रण में ले लिया है. आतंकियों के किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम करने के लिए इन इलाकों में बड़े पैमाने पर 'ऑपरेशन डोमिनेंस' चलाया जा रहा है.

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भीषण गर्मी और उमस की परवाह किए बिना सुरक्षा बलों के जवान हाईवे से सटे उन तमाम संवेदनशील इलाकों को खंगाल रहे हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं. ऊंचे-ऊंचे पेड़ों, बड़े पत्थरों, घनी झाड़ियों, नालों और प्राकृतिक गुफाओं वाले दुर्गम इलाकों में सघन तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई खतरा तो नहीं छिपा है.

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ड्रोन और आतंकियों के छिपने का खतरा

दरअसल, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे से लगे ये इलाके रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं. ये वही इलाके हैं जहां आतंकी आसानी से छिप सकते हैं या फिर सीमा पार से ड्रोन (Drones) के जरिए इन जगहों पर हथियार, गोला-बारूद या विस्फोटक गिराए जाने की आशंका बनी रहती है. इसी खतरे को देखते हुए हाईवे पर न केवल जवानों की तैनाती बढ़ाई गई है, बल्कि आसपास के संदिग्ध इलाकों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.

सुरक्षा ग्रिड हुआ मजबूत

इस बार की अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में करीब 70,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है.

इन जवानों को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर महत्वपूर्ण नाकों और संवेदनशील बिंदुओं पर तैनात किया गया है. इसके अलावा, कई जवानों को जम्मू-कश्मीर पुलिस के 'स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप' (SOG) और सीआरपीएफ (CRPF) की टीमों के साथ भी अटैच किया गया है. सुरक्षा बलों ने यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले सभी अति-संवेदनशील इलाकों की पहचान कर ली है और वहां लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, ताकि शिव भक्तों की यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित रहे.

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