हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज होने वाली है. आगामी 21 अगस्त से हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 3 सितंबर तक चलेगा. 14वीं विधानसभा का यह मानसून सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें पक्ष और विपक्ष के बीच प्रदेश के कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस और तकरार देखने को मिल सकती है. विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस सत्र की तैयारियों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है.

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विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के अनुसार, इस मानसून सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी. उन्होंने बताया कि इस सत्र के पूरा होने के बाद बजट सत्र और मानसून सत्र को मिलाकर विधानसभा की कुल 26 बैठकें पूरी हो जाएंगी. एक कैलेंडर वर्ष में अनिवार्य 35 बैठकों का आंकड़ा छूने के लिए बाकी बची 9 बैठकों को आगामी शीतकालीन सत्र में पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है.

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विधायकों ने दागे 1,036 सवाल, सभी आए ऑनलाइन

सत्र को लेकर विधायकों में खासा उत्साह और सक्रियता देखी जा रही है. 18 अगस्त तक विधानसभा सचिवालय को विधायकों की ओर से कुल 1,036 प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं. इनमें 787 तारांकित (Starred) और 249 अतारांकित (Unstarred) प्रश्न शामिल हैं. खास बात यह है कि पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए ये सभी प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से भेजे गए हैं. इसके अलावा नियमों के तहत भी कई सूचनाएं मिली हैं, जिनमें नियम-62 के तहत 13, नियम-63 के तहत 2, प्राइवेट मेंबर डे (नियम-101) के तहत 5 और नियम-130 के तहत 15 सूचनाएं शामिल हैं.

सदन चलाने के लिए सर्वदलीय बैठक, विपक्ष आक्रामक

मानसून सत्र का संचालन शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से हो, इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष ने मंगलवार शाम 4 बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की जाएगी. पठानिया ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में हिमाचल विधानसभा की कार्यवाही 90 प्रतिशत से अधिक रही है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है.

दूसरी ओर, विपक्ष इस सत्र में पूरी आक्रामकता के साथ सुक्खू सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है. विपक्षी दल सड़क निर्माण, चरमराती स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पूर्व सरकार द्वारा खोले गए विभिन्न संस्थानों को मौजूदा सरकार द्वारा बंद किए जाने जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगेगा. जनता से जुड़े इन तमाम मुद्दों को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि यह मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है.

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