हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में एक नई और अत्याधुनिक क्रांति की शुरुआत हुई है. प्रदेश के सबसे बड़े और प्रमुख सरकारी अस्पताल, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल करते हुए बच्चों के लिए भी रोबोटिक सर्जरी (Robotic Surgery) की सुविधा शुरू कर दी है. इस नई शुरुआत से प्रदेशवासियों को बड़ी राहत मिली है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अब तक यहाँ 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 6 बच्चों की सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी है, जो राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

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आईजीएमसी (IGMC) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राज कुमार ने इस नई तकनीक के फायदों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अस्पताल में पिछले 30 वर्षों से बच्चों की ओपीडी (OPD) सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं. लेकिन अब रोबोटिक तकनीक के जुड़ने से बच्चों की जटिल से जटिल सर्जरी भी बेहद सुरक्षित तरीके से की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि छह माह से अधिक आयु के किसी भी बच्चे की रोबोटिक सर्जरी संभव है.

इस आधुनिक तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें चीरा बहुत छोटा लगता है, जिससे मासूम मरीजों को पारंपरिक (ओपन) सर्जरी की तुलना में काफी कम दर्द होता है. इसके अलावा, संक्रमण (Infection) का खतरा न के बराबर रहता है और बच्चे की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, जिससे उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है.

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कम खर्च में मिल रही है विश्वस्तरीय सुविधा

आईजीएमसी शिमला के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि अस्पताल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मरीजों को कम खर्च पर बेहतरीन और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है. रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी और उन्नत तकनीक भी यहाँ मरीजों को बेहद किफायती दरों पर मुहैया कराई जा रही है. उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले पांच महीनों के दौरान अस्पताल में कुल 112 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं. इनमें सबसे अधिक 62 सर्जरी यूरोलॉजी विभाग और 44 सर्जरी गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग) विभाग में की गई हैं. अब बाल रोग विभाग (Pediatrics) भी इस अत्याधुनिक मशीन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहा है.

बड़े महानगरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति

आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी के इस सफल संचालन से हिमाचल प्रदेश के मरीजों को अब बड़े महानगरों जैसे दिल्ली या चंडीगढ़ का रुख नहीं करना पड़ेगा. अक्सर माता-पिता को बच्चों के जटिल ऑपरेशनों के लिए बाहरी राज्यों के महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनका समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होते थे. लेकिन अब अपने ही राज्य में यह अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा उपलब्ध होने से आम जनता का आर्थिक बोझ भी कम होगा.

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