हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. अब आरक्षण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, सरकार ने बीती शाम ही एक अधिसूचना जारी की है. जिसके तहत पंचायत चुनावों में 5 फीसदी आरक्षण की शक्तियां डीसी को देने का फैसला लिया गया है. सरकार के इस फैसले का विपक्ष विरोध कर रहा है.

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विपक्ष ने सदन में जाने से पहले विधानसभा के बाहर नारेबाजी की और सरकार पर लोकतंत्र के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया. विपक्ष सरकार पर अपने चहेते लोगों को आरक्षण का लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रहा है. फिलहाल विपक्ष काम रोको प्रस्ताव के तहत चर्चा पर अड़ा हुआ है.

सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई विपक्ष ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव के तहत इस पर चर्चा मांगी, जिसके न मिलने पर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया और चर्चा पर अड़ गया. यहां तक कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री बोलने के लिए उठे उनकी बात भी नहीं सुनी गई. विपक्ष की नारेबाजी को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने सदन की कार्यवाही की साढ़े ग्यारह बजे तक स्थगित कर दिया.

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आपदा के नाम पर चुनाव रोकने का किया प्रयास- जय राम ठाकुर

विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार बार-बार जन विरोधी फैसले लेकर अपनी जग हंसाई करवा रही है. पहले आपदा के नाम पर पंचायती राज चुनाव रोकने का प्रयास किया गया. लोग हाइकोर्ट गए और सरकार को चुनाव करवाने के आदेश जारी किए, लेकिन सरकार इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय चली गई. वहां से भी सरकार को राहत नहीं मिली और 31 मई से पहले सर्वोच्च न्यायालय ने पंचायती राज चुनाव करवाने के आदेश जारी किए.

अपने चेहतों को फायदा करवा रही सरकार- विपक्ष नेता

उन्होंने कहा कि इतनी किरकिरी के बाबजूद सरकार पंचायती राज चुनावों को लेकर संजीदा नहीं है. अब सरकार ने आरक्षण को लेकर एक अधिसूचना जारी कर दी है जिसके तहत पंचायतों में 5% आरक्षण करने की शक्तियां जिलाधीशों को दी गई है. जो नियमों के बिल्कुल विपरीत है हार के डर से सरकार अपने चेहतों को फायदा पहुंचाने के लिए आरक्षण से छेड़छाड़ करने की सोच रही है. क्योंकि पंचायत राज चुनावों में पहले से ही आरक्षण का प्रावधान है, जिसके तहत हर साल रोस्टर बदलता है.

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महिलाओं के लिए आरक्षित रखे जाएंगे 50 प्रतिशत पद

हिमाचल प्रदेश में 39 नई पंचायतें बनने के बाद अब कुल पंचायतों की संख्या बढ़कर 3,616 हो गई है. पहले यह संख्या 3,577 थी. सरकार ने पूर्व प्रावधानों में संशोधन करते हुए नियम 28, 87, 88 और 89 में नए प्रावधान जोड़े हैं. अधिसूचना के अनुसार आरक्षण की गणना वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 1993-94 के सर्वेक्षण आंकड़े मान्य होंगे. नए नियमों के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखे जाएंगे.

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