दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को-लोकेशन स्कैम से जुड़े एक मामले में जांच एजेंसी CBI से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. यह मामला तीन कंपनियों, एक ऑडिट फर्म, पांच सिस्टम ऑडिटर्स और एक कर्मचारी से जुड़ा था.
को-लोकेशन सुविधा के तहत NSE ने ब्रोकरों को अपने डेटा सेंटर में सर्वर लगाने की इजाजत दी थी, जिससे उन्हें शेयर बाजार के दामों की लाइव जानकारी आम निवेशकों की तुलना में तेजी से मिलती थी. हालांकि, आरोप था कि कुछ ब्रोकरों ने इसका गलत फायदा उठाया और नियमों की अनदेखी की.
रॉउज एवन्यू कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की
को-लोकेशन मामले में NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण पहले से ही जांच का सामना कर रही हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. उन पर आरोप है कि कुछ ब्रोकरों को डार्क फाइबर और अर्ली लॉगिन जैसी सुविधाएं देकर बाजार में अनुचित लाभ पहुंचाया गया.
रॉउज एवन्यू कोर्ट के स्पेशल जज गगनदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा कि जांच के दौरान ऐसा कोई पैटर्न सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि ब्रोकरों ने प्राइस-वॉल्यूम मैनिपुलेशन, सर्कुलर ट्रेडिंग या पंप एंड डंप जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया. इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट तार्किक है और इसे स्वीकार किया जाता है.
CBI जांच में ऑडिट नियमों के उल्लंघन का खुलासा
जांच एजेंसी CBI के मुताबिक, आरोपियों ने 2013 और 2014 में SEBI से तय किए गए ऑडिट नियमों का उल्लंघन किया. इनमें हर 6 महीने में ऑडिट, कम से कम 3 साल का अनुभव रखने वाले ऑडिटर की नियुक्ति, और किसी एक ऑडिटर से लगातार तीन से ज्यादा ऑडिट न करना शामिल था.
CBI जांच में पाया गया कि ISEC नामक ऑडिट फर्म ने तीन से ज्यादा ऑडिट किए. एक सिस्टम ऑडिटर ने बिना विजिट किए तीन रिपोर्टों पर साइन किए. कई जगह ऑडिट की तारीख साइट विजिट से पहले की बताई गई.
आरोपियों पर अब आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी
CBI ने कोर्ट में दाखिल अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि स्टॉक ब्रोकर और ऑडिट फर्म ISEC ने SEBI की गाइडलाइंस का उल्लंघन तो किया, लेकिन यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले कि इसमें आपराधिक मंशा शामिल थी.
NSE या SEBI के अधिकारियों की भी किसी साजिश या जानबूझकर मिलीभगत नहीं पाई गई. हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल इस मामले में आरोपियों पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी.