Delhi Crime News: देश की राजधानी दिल्ली में हाई-टेक ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने डिजिटल युग में इंसानी भरोसे को कटघरे में ला खड़ा किया है. शाहदरा जिले के एम.एस. पार्क थाना क्षेत्र में हुई इस ठगी की घटना ने आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छिपे ख़तरों को उजागर किया है.
13 अप्रैल को 62 वर्षीय बाबू राम, चंद्रलोक कॉलोनी स्थित पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम से पैसे निकालने गए थे. एटीएम मशीन से थोड़ा संघर्ष करते देख, एक युवक पीछे से आया और बड़ी विनम्रता से मदद की पेशकश की. उस क्षण में कोई खतरा नहीं लगा. युवक ने मशीन को ‘ठीक’ करने की एक्टिंग की और मदद के बहाने बाबू राम का एटीएम कार्ड चुपचाप बदल दिया. कुछ ही घंटों में 60,000 रुपए उनके खाते से निकाल लिए गए.बाबू राम, जिन्हें अपने जीवन की जमा-पूंजी पर पूरा भरोसा था, अचानक खुद को एक शातिर धोखाधड़ी का शिकार पाते हैं.
पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांचएम.एस. पार्क थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया. एसएचओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें एसआई संदीप बिश्नोई, एसआई अमित बेनिवाल, एएसआई सुनील, एएसआई दीपक (टीएसटी), मुख्य आरक्षी अनुज और प्रदीप शामिल थे. टीम ने सबसे पहले संबंधित एटीएम के CCTV फुटेज खंगाले. फुटेज में एक युवक लगातार बुजुर्गों के पास जाकर 'मदद' करता दिखाई दिया. इसके बाद, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में फैले मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय किया गया.
21 अप्रैल , गिरफ्तारी की सुबहएक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम लोनी, गाजियाबाद के नशा बंदी कॉलोनी में पहुंची. यहां से आरोपी फिरोज उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह एक संगठित गिरोह का हिस्सा है, जिसमें फर्मान और ओन्नू नामक दो अन्य साथी भी शामिल हैं.
'एक कार्ड – कई कहानियां'गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपी के ठिकाने की तलाशी ली, तो 39 अलग-अलग बैंकों के ATM कार्ड बरामद हुए. हर कार्ड किसी न किसी भोले व्यक्ति से धोखे से छीना गया था. आरोपी ने बताया कि वे लोगों की कार्ड डिटेल्स और PIN नंबर चुपचाप देख लेते थे और फिर उनके कार्ड बदल देते थे. बाद में कार्ड का इस्तेमाल करके विभिन्न एटीएम से पैसे निकाल लिए जाते थे.
संगठित अपराध की नई परछाईपुलिस की जांच में सामने आया कि फिरोज और उसके साथी NCR क्षेत्र में घूम-घूम कर एटीएम ठगी करते थे. वे ऐसे बुज़ुर्ग या कम पढ़े-लिखे लोगों को चुनते थे जो तकनीक से अनभिज्ञ थे. उनकी सबसे बड़ी चाल थी 'मदद' का मुखौटा.
पिछला आपराधिक इतिहासपुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी फिरोज पहले भी चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तार हो चुका है. जेल से छूटने के बाद उसने अपने अपराध को एक ‘व्यवसाय’ का रूप दे दिया.
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