जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है. नामांकन की आखिरी तारीख रविवार (22 मार्च) को खत्म हो गई, लेकिन नीतीश कुमार के अलावा किसी भी नेता ने इस पद के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया. ऐसे में अब चुनाव की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है.
नामांकन पत्रों की जांच सोमवार को की जाएगी, जबकि नाम वापसी की आखिरी तारीख 24 मार्च तय है. चूंकि कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं है, इसलिए 24 मार्च को ही आधिकारिक तौर पर नीतीश कुमार को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा. उनका कार्यकाल अब 2028 तक रहेगा.
चौथी बार बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष
नीतीश कुमार के लिए यह चौथी बार होगा जब वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे. इससे पहले वे 2016 में पहली बार इस पद पर आए थे, जब शरद यादव ने अध्यक्ष पद छोड़ा था. इसके बाद 2019 में उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाया गया.
2020 में नीतीश कुमार ने खुद ही अध्यक्ष पद छोड़कर आरसीपी सिंह को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी. बाद में आरसीपी सिंह के बाद ललन सिंह अध्यक्ष बने. लेकिन दिसंबर 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान संभाल ली और तब से वे ही अध्यक्ष हैं.
नामांकन पहले ही कर चुके थे दाखिल
नीतीश कुमार ने 19 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित जदयू कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया था. उनके नामांकन पत्र दो सेटों में जमा किए गए थे, जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने चुनाव अधिकारी को सौंपा था.
इस बीच नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं और अगले महीने उनके दिल्ली जाने की चर्चा है. माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं, हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका जारी रहेगी.
पार्टी में मजबूत पकड़ बरकरार
लगातार चौथी बार अध्यक्ष बनना यह दिखाता है कि जदयू में नीतीश कुमार की पकड़ अभी भी मजबूत है. पार्टी के अंदर उनके खिलाफ कोई चुनौती नहीं दिख रही है और संगठन पूरी तरह उनके नेतृत्व में एकजुट नजर आ रहा है.
