बिहार के नवादा सदर अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है. बिजली की अनियमित आपूर्ति और बैकअप जनरेटर के निष्क्रिय रहने से रोजाना दर्जनों मरीज परेशान हो रहे हैं. अस्पताल में प्रसूति वार्ड के बगल में स्थापित यह आधुनिक सुविधा मरीजों के लिए वरदान साबित होने की बजाय अभिशाप बन गई है.

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जानकारी के अनुसार, एक महीने पहले लाया गया जनरेटर अब तक कनेक्शन के अभाव में सिर्फ शोपीस बना हुआ है. जिससे बिजली कटते ही स्कैनिंग पूरी तरह बंद हो जाती है.

स्वास्थ्य मंत्री की व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के नेतृत्व वाली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रहा है. राज्य में कई सदर अस्पतालों में बिजली और जनरेटर की समान समस्याएं बार-बार सामने आती रही हैं. लेकिन नवादा में सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का यह हाल बेहद चिंताजनक है. सरकार ने पीपीपी मोड में निजी कंपनी मेडियन डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड को सीटी स्कैन संचालन का जिम्मा सौंपा है.

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अस्पताल ने कंपनी को भवन सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं मुहैया कराईं, लेकिन कंपनी की कार्यप्रणाली बेहद असंतोषजनक साबित हो रही है. मरीजों को लंबी प्रतीक्षा के बाद भी स्कैन नहीं हो पाता, जिससे वे नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. अस्पताल कर्मचारियों को भी रोजाना लोगों का गुस्सा झेलना पड़ रहा है.

अस्पताल प्रबंधन ने कंपनी को दी चेतावनी

अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने इस मुद्दे पर कंपनी को पत्र लिखकर तत्काल सुधार की मांग की है. उन्होंने बताया कि पहले भी कई शिकायतें मिली हैं और यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो सिविल सर्जन कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे. मरीजों का कहना है कि बिजली न होने पर जनरेटर चालू करने में देरी या उसका काम न करना आम बात हो गई है. गंभीर मरीजों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे रेट पर स्कैन कराना मजबूरी बन जाता है. बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की यह तस्वीर नई नहीं है. जिलों में भी जनरेटर खराब या डीजल न होने से इलाज प्रभावित होता रहा है.

नवादा में हाल ही में 108 करोड़ की लागत से नए 200 बेड वाले सदर अस्पताल का शिलान्यास हुआ है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं हैं. उम्मीद है कि नया अस्पताल बनने से मौजूदा समस्याओं से राहत मिलेगी. फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग को तुरंत हस्तक्षेप कर मौजूदा व्यवस्था सुधारने की जरूरत है ताकि गरीब मरीजों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े.

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