बिहार चुनाव के बाद सरकारी आवास को लेकर सियासत तेज हो चुकी है. पहले भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड को खाली करने का नोटिस दे दिया और उन्हें 39 हार्डिंग रोड पर नया बंगला आवंटित किया गया. 

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इसको लेकर अब आरजेडी ने जेडीयू के दो सांसद और जीतन राम मांझी के आवास को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है. साथ ही आरजेडी ने भवन निर्माण विभाग को पत्र भी लिखा है. इसमें कहा गया है कि संजय झा, देवेश चंद्र ठाकुर और जीतन राम मांझी किस हैसियत से पटना में आवास लिए हुए हैं?

आरजेडी ने भवन निर्माण विभाग को लिखा पत्र

आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखा है. जिसमें कहा गया है कि देवेश चंद्र ठाकुर जो पहले सभापति थे उस वक्त उन्हें बिहार सेंट्रल पूल का आवास आवंटित था. परंतु लोकसभा चुनाव में वह सीतामढ़ी से निर्वाचित होकर सांसद बने हैं. फिर पटना में  बिहार सेंट्रल पूल का मकान पर क्यों कब्जा किए हुए हैं.

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वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा को भी मंत्री रहते हुए बिहार सेंट्रल पूल का आवास आवंटित किया गया था. जिसे वे अब तक अपने पास रखे हुए हैं. आरजेडी ने सवाल खड़ा किया है और कहा है कि ये दोनों  बिहार सेंट्रल पूल के मकान में किस हैसियत से रह रहे है इसकी जानकारी चाहिए. विभाग ने अभी तक इस संदर्भ में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की है. 

आरजेडी ने विभाग पर खड़े किए सवाल 

आरजेडी की ओर से सवाल खड़ा करते हुए कहा गया कि अब तक आवास खाली नहीं कराया जाना और रसूख के बल पर बंगले पर काबिज रहना किस नियम के अधीन आता है. जो नियम है कि 10 गुना अधिक भुगतान किया जाएगा, वह किया जा रहा है या रसूख के बल पर उन्हें दिया गया है. इस बंगले से दोनों सदस्यों का क्या मोह है. क्या इस बंगले में तहखाना तो नहीं है जिसको बचाने और खपाए जाने के कारण अभी तक बंगला कब्जे में रखे हुए हैं. 

जीतन राम मांझी के आवास को लेकर भी साधा निशाना

आरजेडी ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी निशाना साधते हुए उनके आवास को लेकर सवाल खड़ा किया है .पत्र में लिखा गया है की जीतन राम मांझी भी बिहार सेंट्रल पूल के आवास को अपने कब्जे में रखे हुए हैं वह किस हैसियत से उस मकान में रह रहे हैं. 2024 में गया के लोकसभा के सांसद बन चुके हैं. 

आगे कहा गया कि उनकी बहू दीपा मांझी विधायक बनी है तो भवन निर्माण विभाग को यह बताना चाहिए कि क्या यह बंगला उनकी बहू को दिया जाएगा. क्या सीनियरिटी इसकी इजाजत देती है. पत्र के अंत में यह भी विभाग से मांगा गया है कि इन सभी आवासों को कब तक खाली कराया जाएगा, इसकी तिथि भी बताएं. साथ ही इतने दिनों से जो यह लोग रह रहे हैं उनसे कितनी गुना अधिक वसूली की गई है.