बिहार के मोतिहारी में एनडीपीएस कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के मामले में बखरी पंचायत के मुखिया अख्तर साह को 10 साल की कठोर सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अख्तर साह पूर्व में बिहार पुलिस का सिपाही रह चुका है, जिसे आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था.

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मामला आदापुर थाना क्षेत्र के झिटकहिया गांव का है. जानकारी के मुताबिक अख्तर साह के घर पर एसएसबी 71वीं बटालियन और आदापुर पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की थी. इस दौरान उसके दरवाजे पर खड़ी स्कॉर्पियो से 131 किलो गांजा बरामद किया गया था. पुलिस ने मौके से अख्तर साह को गिरफ्तार करते हुए वाहन भी जब्त कर लिया था.

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पूर्व सिपाही से बना पंचायत का मुखिया

अख्तर साह पहले बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात था. मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान उस पर एटीएम लूट, फ्रॉड, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगे थे. इसके बाद उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. बाद में उसने पंचायत चुनाव लड़ा और 2021 में बखरी पंचायत से मुखिया निर्वाचित हुआ.

नेपाल सीमा का फायदा उठाकर चलाता था नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया कि भारत-नेपाल सीमा के नजदीक होने का फायदा उठाकर अख्तर साह मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क चला रहा था. बताया गया कि उसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. एसएसबी को इसकी जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई थी.

कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर फैसला

मोतिहारी एनडीपीएस कोर्ट-01 की न्यायाधीश रेशमा वर्मा ने आदापुर थाना पुलिस की चार्जशीट और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया. विशेष लोक अभियोजक शंभू शरण सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की. सजा सुनाए जाने के बाद अख्तर साह के जेल जाने के कारण बखरी पंचायत का कार्यभार उप मुखिया काशी मुखिया संभाल रहे हैं.

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