बिहार विधानसभा चुनाव के बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान के बावजूद राजद ने अपने उम्मीदवारों को टिकट बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के दिल्ली से पटना लौटते ही उनके 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर उम्मीदवारों और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

Continues below advertisement

सुबह से ही टिकट की उम्मीद में सैकड़ों दावेदार लालू यादव के आवास पर जुटे रहे. भीड़ इतनी अधिक थी कि कई बार अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई. बताया जा रहा है कि पार्टी मुख्यालय से कई नेताओं को फोन कॉल के जरिए टिकट की सूचना दी गई थी, जिसके बाद वे औपचारिक तौर पर चुनाव चिह्न लेने पहुंचे. कुछ ही देर बाद उनके चेहरे पर मुस्कान और हाथ में पार्टी का चुनाव चिह्न 'लालटेन' नजर आया.

लालू ने प्रत्याशियों को थमाया लालटेन का चुनाव चिह्न

सूत्रों के मुताबिक, जिन नेताओं को टिकट सौंपा गया है, उनमें कुछ प्रमुख नाम भी शामिल हैं. इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुए सुनील सिंह (परबत्ता) और मटिहानी से कई बार विधायक रह चुके नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ 'बोगो' शामिल हैं. बोगो पूर्व में दो बार जदयू के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं.

Continues below advertisement

कई विधायकों को मिला चुनाव लड़ने का दोबारा मौका

इसके अलावा पार्टी के कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा मौका दिया गया है. भाई वीरेंद्र, चंद्रशेखर यादव (मधेपुरा) और इसराइल मंसूरी (कांटी) जैसे नेताओं को भी सोमवार को टिकट सौंपा गया. इन सभी ने लालू प्रसाद के आवास के बाहर पार्टी का प्रतीक लहराकर अपने प्रत्याशी बनने की खुशी जाहिर की.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सोमवार को कुल कितने उम्मीदवारों को पार्टी ने आधिकारिक टिकट दिया है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि लालू यादव ने महागठबंधन के सीट बंटवारे में देरी को देखते हुए खुद आगे बढ़कर यह कदम उठाया है.

अंतिम चरण की 122 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू 

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की 122 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि पहले चरण के नामांकन के लिए केवल चार दिन का समय बचा है. ऐसे में राजद द्वारा टिकट वितरण की शुरुआत यह संकेत देती है कि पार्टी अब देरी किए बिना चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है.

महागठबंधन में अभी तक सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक घोषणा नहीं हो पाई है, जिससे अंदरूनी मतभेदों की चर्चा तेज है. ऐसे में लालू यादव का यह कदम न सिर्फ राजनीतिक रूप से साहसिक माना जा रहा है, बल्कि विपक्षी गठबंधन की दिशा तय करने वाला भी साबित हो सकता है.