महागठबंधन में संभावना है कि मंगलवार (14 अक्टूबर, 2025) को सीट शेयरिंग का ऐलान हो जाए. माना जा रहा है कि महागठबंधन में शामिल दलों से लगभग बात पूरी हो गई है. हालांकि मुकेश सहनी को बड़ा घाटा हो रहा है. वह इसलिए कि जिस हिसाब से वे 60 सीटों की बात कर रहे थे उसका आधा भी उन्हें नहीं मिल रहा है. सूत्रों की मानें तो विकासशील इंसान पार्टी को 15 सीट से ज्यादा देने पर विचार नहीं हो रहा है.

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पहले समझ लें महागठबंधन में सीटों का फॉर्मूला

सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव के साथ कांग्रेस की 60 सीटों पर बात हुई है. यानी कांग्रेस और आरजेडी के बीच अब कोई दिक्कत नहीं है. अब खासतौर पर वीआईपी के मुकेश सहनी से आरजेडी की बातचीत जारी है. लेफ्ट के दलों को 30 सीटें मिल सकती हैं. वीआईपी के लिए 15 सीट तो वहीं जेएमएम को दो और IIP को एक सीट देने पर विचार हुआ है. खुद आरजेडी 135 सीटों पर लड़ेगी.

दूसरी ओर सवाल है कि अगर मुकेश सहनी को 15 से अधिक सीटें नहीं दी जाती हैं तो क्या वे तैयार होंगे या फिर 2020 के विधानसभा चुनाव की तरह फिर से अचानक एनडीए के साथ चले जाएंगे? इस तरह के सवालों की चर्चा सियासी गलियारे में शुरू हो गई है. हालांकि एनडीए गठबंधन में सीटों का बंटवारा हो गया है. बीजेपी और जेडीयू 101-101 सीट पर लड़ेगी. वहीं चिराग की पार्टी को 29 सीटें दी गई हैं. जीतन राम मांझी की पार्टी हम और उपेंद्र कुशवाहा को छह सीटें मिली हैं. सवाल है कि अगर मुकेश सहनी एनडीए में आते हैं कौन सा दल सीटों का त्याग करेगा? यहां बता दें कि एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान हो गया है लेकिन साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस जो सोमवार को पटना में होनी थी वह नहीं हुई है. किसी कारण पीसी टल गई. यानी एनडीए में भी सीटों को लेकर खींचतान जारी है.

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सहनी को लेकर क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?

राजनीतिक जानकार धीरेंद्र कुमार ने कहा कि मुकेश सहनी ने अचानक दिल्ली जाने का प्लान बनाया. जाने से पहले उनकी जो भाषा थी उससे बहुत कुछ पता चल रहा था. अब मुकेश सहनी पर निर्भर करता है कि वो महागठबंधन में रहते हैं कि नहीं. महागठबंधन की ओर से इनकी शर्तों पर कुछ ऑफर नहीं होगा. एनडीए में रास्ता खुला है? इस पर कहा कि ये कहना मुश्किल है. मुझे लगता है कि मुकेश सहनी के लिए एनडीए का रास्ता अब बंद हो गया है, लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है. हो सकता है कोई विकल्प खुल जाए. अगर विकल्प खुलता है तो मुश्किल से छह सीट मिल पाएगी. महागठबंधन हो या एनडीए मुकेश सहनी अब डिमांड करने की स्थिति में नहीं हैं.

मुकेश सहनी की पार्टी क्या बोली?

उधर वीआईपी पार्टी के एक बड़े नेता ने कहा कि अखिलेश सिंह (कांग्रेस नेता) के चलते सीटें कम की जा रही हैं. वे लालू यादव के कान भर रहे हैं. आरजेडी पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि अगर वीआईपी को ज्यादा सीट दे दी गई तो जीतने के बाद वे बीजेपी के साथ जा सकते हैं और सरकार बना सकते हैं. इस सवाल पर कि क्या एनडीए में जाने की संभावना बन रही है? इस पर कहा गया कि नहीं, महागठबंधन में ही रहना है.