असम सरकार ने कहा है कि बहुविवाह में शामिल पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा. उन्हें भविष्य में भी सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. इस पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की ओर से बड़ा बयान आया है. जेडीयू इस फैसले से असहमत है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बुधवार (04 नवंबर, 2026) को इस पर टिप्पणी की.

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असम सरकार के इस निर्णय पर जेडीयू नेता ने कहा, "अब वो किस कानून के तहत यह कानून बनाए हैं, यह तो वो जानें. ऐसा कोई प्रावधान तो है नहीं. हां, बहुविवाह का भी हमारे यहां परंपरा है. भगवान राम के पिता श्री दशरथ ने तीन शादियां की थीं, तो राम को भी आप हटा दीजिए. कौरव के पिता की कई शादियां हुई थीं, तो उसको भी आप हटा दीजिए, उसकी भी पूजा मत कीजिए, मंदिर हटा दीजिए." 

उन्होंने आगे कहा, "...पहले तो चीजों की समीक्षा होनी चाहिए. पहले काम करें, असम जल रहा है... लंबा-लंबा भाषण नहीं दें. आए हैं बाहर से, तो ज्यादा प्याज खाने का काम न करें, काम करें."

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असम सरकार ने क्या फैसला लिया है?

एक लाइन की बात यही है कि असम के सरकारी कर्मचारी अब बहुविवाह नहीं कर सकेंगे. यानी एक से अधिक शादी नहीं करनी है. अगर किसी कर्मचारी ने ऐसा किया तो उनको सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. यह बड़ा फैसला असम की सरकार ने लिया है.

दरअसल, हिमंता बिस्वा सरकार ने असम सेवा अनुशासन नियम, 1964 में संशोधन किया है. इसके अनुसार, अगर सरकारी कर्मचारी अगर एक से ज्यादा शादी करता है तो उस उसको नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा. साथ ही आगे वह सरकारी नौकरी भी नहीं कर पाएगा.

सरकार ने अनुशासन नियम 7 में नया खंड 6 जोड़ दिया है. इतना ही नहीं ऐसे लोग राज्य सरकार की किसी कल्याणकारी योजना का लाभ भी नहीं उठा पाएंगे. यह नियम किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी धर्मों के सरकारी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा.

इस फैसले के बाद अब तमाम दलों की ओर से रिएक्शन आ रहे हैं. इसी क्रम में नीतीश कुमार की पार्टी की ओर से भी पक्ष रखा गया है.

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