आठ अगस्त 2025 की तिथि सिर्फ सीतामढ़ी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए यादगार होगी. अयोध्या के राम मंदिर की तरह सीतामढ़ी में माता जानकी के भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण का भूमि पूजन होना है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शिलान्यास करेंगे. इस मौके पर नीतीश कुमार समेत कई केंद्रीय मंत्री और राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक एवं साधु-संत भी रहेंगे.
मंदिर निर्माण के बाद जैसे यूपी को प्रभु श्रीराम की जन्म धरती के नाम से जाना जाता है, तो बिहार को माता सीता की प्राकट्य स्थली के रूप में देश और विदेश में जाना जाएगा. ऐसे में पुनौरा धाम में बड़ी तैयारी हो रही है. राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुनौरा मंदिर प्रबंधन की ओर से पूरी ताकत लगा दी गई है. हर दिन दो से चार केंद्रीय और राज्य के मंत्री पुनौरा धाम पहुंचकर जायजा ले रहे हैं.
तिरुपति के कारीगर बना रहे खास लड्डू
882 करोड़ की लागत से मंदिर के निर्माण साथ और अन्य कार्य होंगे. शिलान्यास के दिन प्रसाद के रूप में वितरण के लिए खास लड्डू बनवाया जा रहा है. तिरुपति से विशेष कारीगर पहुंचे हैं. तिरुपति बालाजी में जिस तरह का लड्डू मिलता है, वैसा ही यहां बनवाया जा रहा है. यह लड्डू हनुमान मंदिर (पटना) के प्रबंधन की ओर से तैयार कराया जा रहा है.
500 साधु-संतों के भोजन की व्यवस्था
हनुमान मंदिर (पटना) की ओर से 500 साधु-संतों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई है. खाने में पूड़ी, खीर और सब्जी की तैयारी है. उपवास रखने वाले साधु-संतों के लिए साबूदाने की खीर और फल की व्यवस्था की जा रही है.
इतना बड़ा कार्यक्रम है तो सरकारी और निजी स्कूल शुक्रवार को सीतामढ़ी में बंद रहेंगे. आंगनबाड़ी केंद्र और कोचिंग संस्थान भी बंद रहेंगे. डीएम रिची पांडेय ने निर्देश जारी किया है. कार्यक्रम के चलते संभावित भीड़ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. दूसरी ओर इतना बड़ा कार्यक्रम है तो सुरक्षा-व्यवस्था भी दुरुस्त है. जिला प्रशासन अलर्ट है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि हमलोग धन्य हैं, जो इस पावन कार्यक्रम के साक्षी बन रहे हैं. जब से राम मंदिर बना, तब से बिहार वासी, खासकर सीतामढ़ी वासी मां सीता के भव्य मंदिर का सपना देख रहे थे. अब वह सपना साकार होने जा रहा है.
शिलान्यास कार्यक्रम को पवित्र बनाने के उद्देश्य से देश भर के 31 पवित्र नदियों का जल कलश में लाया गया है. वहीं, 21 तीर्थ स्थलों की मिट्टी लाई गई है. बताया गया कि उक्त पवित्र नदियों के जल का उपयोग भूमि-पूजन एवं प्रसाद बनाने में उपयोग किया जाएगा.
मिथिला के लोग सीता को मानते हैं बेटी
बता दें कि मंदिर के निर्माण से लोग काफी खुश हैं. मिथिला क्षेत्र के सीतामढ़ी में जानकी का जन्म होने और जनकपुर से शादी होने के चलते यहां के लोग माता सीता को बेटी की तरह मानते हैं. प्रभु श्रीराम को दामाद मानते हैं.