विधानसभा बजट सत्र के दौरान सदन में चर्चा के दौरान LJP R विधायक दल के नेता राजू तिवारी ने विद्युत शवदाह गृह की कमी को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोगों को दाह संस्कार के समय कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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राजू तिवारी ने बताया कि अभी भी अधिकांश स्थानों पर लकड़ी से शवों का दाह संस्कार किया जाता है, जिससे वनों की कटाई तेजी से हो रही है. इससे न केवल पेड़ कम हो रहे हैं, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. लकड़ी जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए यह गंभीर खतरा है. ऐसे में राज्य में विद्युत शवदाह गृह बनाना आवश्यक हो गया है, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके और पारंपरिक दाह संस्कार प्रक्रिया के पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके.

राजू तिवारी बोले- मेरे बयान का गलत तरीके से पेश कर रहे नेता

जानकारी के अनुसार, जैसे ही राजू तिवारी ने यह कहा कि लकड़ी से शवों को जलाने से प्रदूषण बढ़ता है. NDA के कुछ नेता असहज हो गए. RLM कोटे से मंत्री दीपक प्रकाश और BJP के विधायक जीवेश मिश्रा ने उनके बयान को रोकने की कोशिश की. राजू तिवारी ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका बयान गलत तरीके से समझा गया. उनका मुख्य उद्देश्य यह था कि वनों की कटाई हो रही है, पेड़ कट रहे हैं और इससे प्रदूषण बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की आवश्यकता को उठाना था.

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राज्य में पर्याप्त विद्युत शवदाह गृह बनाए जाएं- राजू तिवारी

सदन में यह मुद्दा पर्यावरण और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन की अहमियत को उजागर करता है. विधायक ने यह भी कहा कि यदि राज्य में पर्याप्त विद्युत शवदाह गृह बनाए जाएं, तो न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि लोगों को दाह संस्कार में आने वाली कठिनाइयों से भी राहत मिलेगी.

जानकारी के अनुसार, राजू तिवारी की इस पहल ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक समाधि प्रथाओं पर चर्चा को नई दिशा दी है.

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