NPS या UPS... किस पेंशन स्कीम को चुनना सरकारी कर्मचारियों के लिए फायदेमंद? जानें काम की बात
वक्त के साथ पेंशन सिस्टम में कई बदलाव किए गए. पहले जो व्यवस्था थी. उसमें कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिलती थी. इसके बाद में एक नई स्कीम लाई गई, जिसमें निवेश और रिटर्न के आधार पर पेंशन तय होती है. यही वजह है कि आज सरकारी कर्मचारियों के सामने UPS और NPS दो ऑप्शन हैं.
यूनिफाइड पेंशन सिस्टम यानी UPS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रिटायरमेंट के बाद हर महीने फिक्स पेंशन मिलती है. कर्मचारियों को यह भरोसा रहता है कि उनकी इनकम कभी बंद नहीं होगी. इससे फ्यूचर की प्लानिंग आसान हो जाती है.
वहीं दूसरी ओर नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS अलग तरीके से काम करता है. इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों कॉन्ट्रिब्यूट करते हैं. यह पैसा शेयर मार्केट और बॉन्ड जैसी जगहों पर लगाया जाता है. रिटर्न मार्केट के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. यानी इसमें रिस्क भी है और ज्यादा कमाई का चांस भी.
UPS में सिक्योरिटी है. लेकिन इसमें ज्यादा ग्रोथ की संभावना नहीं होती. वहीं NPS में उतार-चढ़ाव का रिस्क रहता है. लेकिन लंबे समय में रिटर्न काफी बेहतर मिल सकते हैं. यह उन लोगों के लिए सही है. जो मार्केट-लिंक्ड स्कीम को समझते हैं और ज्यादा पेंशन चाहते हैं.
सरकार चाहती है कि कर्मचारियों को विकल्प चुनने की आजादी मिले. इसलिए उन्हें UPS और NPS में से चुनने की सुविधा दी जा रही है. हालांकि ध्यान रहे कि इस फैसले को बदलने का मौका सिर्फ एक बार ही मिलता है. इस वजह से चुनाव बेहद सोच-समझकर करना होगा.
आखिरकार यह तय करना आपकी प्रायोरिटी पर निर्भर करता है. अगर आप रिस्क नहीं लेना चाहते और फिक्स पेंशन चाहते हैं तो UPS सही रहेगा. लेकिन अगर आपका फोकस ज्यादा पेंशन और लंबे समय में बेहतर ग्रोथ पर है तो NPS ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है.