सफेद कपड़े पहनकर लाल गेंद से ही क्यों खेला जाता है टेस्ट क्रिकेट? हैरान करने वाली है वजह
टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत साल 1877 से हुई थी. जहां ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मुकाबला हुआ था. टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत से ही इस फॉर्मेट में खिलाड़ी सफेद कपड़े पहनकर लाल गेंद से खेलते हुए नजर आते हैं. इसके पीछे कई कारण है.
स्पोर्ट्सकीड़ा के मुताबिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के मैरीलेबॉन क्रिकेट क्लब के रिसर्च ऑफिसर नील रॉबिनसन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि क्रिकेट 18वीं सदी में शुरू हुआ था और उस वक्त लोगों को वही कपड़ों का इस्तेमाल करना पड़ा, जो आसानी से उपलब्ध थे.
नील ने आगे बताया कि सफेद पहनना पूरी तरह प्रैक्टिकल फैसला था. वो इस वजह से क्योंकि क्रिकेट एक समर स्पोर्ट, यानी गर्मी के दिनों का खेल था. इस वजह से सफेद रंग के कपड़े पहने जाते थे जिससे वो धूप न सोखे, और ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को रिफ्लेक्ट कर दे.
इस तरह खिलाड़ियों का तनाव कम होता और वो बिना बेहोश हुए, मैदान पर ज्यादा देर तक रुक पाते थे. दूसरी वजह ये थी कि ब्रिटिश लोग सफेद रंग रॉयल्टी और शान का प्रतीक मानते थे. यही कारण है कि उन्होंने खेल में भी सफेद पहनना शुरू कर दिया.
टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े की वजह से ही लाल गेंद से खेलना शुरू किया गया. क्योंकि अगर कपड़ा सफेद है, तो गेंद कैसे सफेद हो सकती है. अगर ऐसा किया जाता तो, गेंद को देखने में काफी दिक्कत होती.
इसी वजह से टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद का इस्तेमाल होने लगा, जो सफेद कपड़ों के बीच आसानी से नजर आ जाए. वहीं अब डे नाइट टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल होने लगा, क्योंकि रात में वो आसानी से दिखता है.