✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

Kabirdas Jayanti 2022: सफलता के करीब पहुंचा देते हैं कबीर के ये दोहे

ABP Live   |  13 Jun 2022 12:54 PM (IST)
1

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान (अर्थ- सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए. तलवार की कीमत होती है मयान की नहीं)

2

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय (अर्थ - दूसरों में बुराई मत ढूंढो, खुद की खामियों पर काम करों)

3

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय (अर्थ- ज्ञानी वही है जो बात के महत्व को समझे, बेकार की बातों में न उलझे)

4

तिनका कबहुं ना निन्दिये, जो पांवन तर होय, कबहुं उड़ी आंखि न पड़े, तो पीर घनेरी होय (अर्थ - छोटे बड़े के फेर में कभी नहीं पड़ना चाहिए, इंसानों को समान नजरों से देखें)

5

चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह, जिसको कुछ नहीं चाहिए वो शहनशाह (अर्थ - संतुष्ट व्यक्ति सदा सुखी होता है)

6

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय (अर्थ- धैर्य से पुण्य फल मिलता है, पेड़ को सौ घड़े पानी से भी सींच दें, तब भी ये फल ऋतु आने पर ही देगा)

7

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत चन्दन भुवंगा बैठिया, तऊ सीतलता न तजंत (अर्थ- कई दुश्मनों से घिरे होने पर भी सज्ज्न अपना स्वभाव नहीं बदलता,जैसे चंदन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं पर वो अपनी शीतलता नहीं छोड़ता)

8

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि, हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि (अर्थ- वाणी अमूल्य रत्न है. हमेशा तोल-मोल कर बोलना चाहिए)

9

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय (अर्थ- हमारी निंदा करने वाले से घृणा नहीं प्रेम करें. क्योंकि वो आपकी कमियां बताकर आपको सचेत करता है)

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • धर्म
  • Kabirdas Jayanti 2022: सफलता के करीब पहुंचा देते हैं कबीर के ये दोहे
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.