2026 में नई शुरुआत चाहते हैं? जीवन की दिशा बदल सकते हैं भारत के ये 5 शक्तिशाली तीर्थस्थल
साल 2026 की शुरुआत होने के साथ लोगों ने अपना पूरा रूटीन बना लिया है. इसके अलावा साल भर घूमने की प्लानिंग अभी से कर ली होगी. हो सकता है सभी ने न कि हो लेकिन जिन्हें घूमना पसंद है, उन्होंने जरूर की होगी. इस साल अगर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो भारत के इन 5 तीर्थस्थलों पर जरूर घूमकर आए.
भारत के तीर्थ स्थलों में तिरुपति मंदिर प्रमुख है. भक्त यहां सालों के इंतजार के बाद शुक्रिया, उम्मीदें और मन्नतें लेकर आते हैं. भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करने से जीवन में परेशानियां दूर होने के साथ खुशहाली लाती है. तिरुपति को जो चीज ताकतवर बनाती है, वो है अनुशासन. लंबी-लंबी कतारें, थका देने वाली चढ़ाई और सब्र की परीक्षा होती है, लेकिन भक्तों का यही समर्पण आशीर्वाद का काम करता है. कई तीर्थयात्रियों का कहना है कि, तिरुपति के दर से जवाब लेकर नहीं, बल्कि राहत लेकर जाते हैं. जो भी लोग 2026 में नई शुरुआत करना चाहते हैं, उन्हें तिरुपति जरूर जाना चाहिए.
कई लोगों ने अपने जीवन में एक न एक बार जरूर वैष्णो देवी की यात्रा जरूर की होगी. मुश्किल चढ़ाई, निरंतर मंत्रोच्चार, थकान मिलकर प्रार्थना बन जाती है, जिसे मां वैष्णो देवी स्वीकार करती हैं. माना जाता है कि, माता वैष्णो देवी केवल सच्ची पुकार सुनती हैं, इस वजह कहते हैं कि, माता बुलाती हैं. 2026 में जिंदगी जब बोझिल लगने लगे तो वैष्णो देवी की यात्रा नई ऊर्जा का संचार करती है.
शिरडी केवल शान-शौकत से भरी नहीं है, बल्कि इसकी ताकत सादगी में भी है. साईं बाबा की शिक्षाएं विश्वास, सब्र और सेवा पर आधारित है. कई लोगों का मानना है कि, साईं बाबा जीवन में आनेवाली रुकावटें, देरी, भ्रम, भावनात्मक भारीपन को दूर करते हैं, जिससे जीवन में आगे का रास्ता आसान हो जाता है. जिन भी लोगों साल 2026 में इस तरह की चीजों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें शिरडी साईं बाबा के दर्शन करने जरूर जाना चाहिए.
वाराणसी केवल एक शहर नहीं, बल्कि मन की एक आध्यात्मिक अवस्था है. काशी विश्वनाथ में शिवजी की पूजा समय के रूप में की जाती है, वह शक्ति जो डर और भ्रम को दूर करने का काम करते हैं. 2026 में काशी जाना काफी गहरा लेकिन अधिक बदलाव भरा साबित हो सकता है. यह आराम के बारे में नहीं है. यह सच्चाई के बारे में जिसका सामना सभी को करना है.
गुरुवायूर मंदिर केरल भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित है, जो प्रजनन क्षमता और भलाई से जुड़ा है. जो लोग साल 2026 में अपने जीवन में खुशी, स्थिरता और गर्मजोशी लाना चाहते हैं, उनके लिए गुरुवायूर मंदिर एक आशीर्वाद के रूप में काम करता है.