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Chhath Puja 2025: इन 5 चीजों के बिना अधूरी मानी जाती है छठी मैया की पूजा, जानें कौन-सी हैं वो चीजें

निशात अंजुम   |  12 Oct 2025 07:06 AM (IST)
1

छठ पूजा, सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का चार दिवसीय हिंदू पर्व है, जो कार्तिक महीने में मनाया जाता है. इस दौरान भक्त निर्जला व्रत रखते हैं और डूबते तथा उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. यह पर्व घर-परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है.

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छठ पूजा ठेकुआ के बिना अधूरी मानी जाती है क्योंकि ठेकुआ सूर्य देव और छठी मैया का प्रिय और पारंपरिक प्रसाद है. यह आस्था, भक्ति और प्रेम का प्रतीक है. गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना यह प्रसाद न केवल पारंपरिक है, बल्कि इसे बनाते और बांटते समय लोग प्रेम और एकता की भावना भी महसूस करते हैं.

3

छठ पूजा में गन्ने का भी अपना महत्व होता है, क्योंकि यह छठी मैया को प्रिय माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करता है. मान्यता है कि गन्ना छठी मैया को बहुत प्रिय है और उन्हें चढ़ाने से वह प्रसन्न होती हैं.कुछ लोग मानते हैं कि छठ पूजा में गन्ना रखने से परिवार में मिठास बनी रहती है और छठी मैया की कृपा प्राप्त होती है.

4

छठ पूजा में पान-सुपारी का महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यह पूजा के संकल्प का एक आवश्यक हिस्सा है. ऐसा माना जाता है कि सुपारी में देवी-देवताओं का वास होता है और इसका प्रयोग पूजा को पूर्ण करता है. इसके बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि यह धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का अभिन्न अंग है.

5

छठ पूजा में गागर नींबू या बड़ा नींबू का विशेष महत्व है, और इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है, क्योंकि यह प्रकृति के उपहारों में से एक है और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है. इसे 'डाभ नींबू' के नाम से भी जाना जाता है, जो छठ पूजा की सामग्री की एक प्रमुख वस्तु है, जिसे बांस के सूप या डाली में रखा जाता है. यह सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रसाद है.

6

छठ पूजा में नारियल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि यह भगवान सूर्य और देवी छठी मैया की पूजा में एक अत्यंत पवित्र और शुभ प्रतीक है. इसे श्रीफल भी कहा जाता है और इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है. छठ के दौरान, नारियल चढ़ाने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और बुद्धि, मनोकामना पूर्ति और अहंकार त्यागने का प्रतीक है, इसलिए इसके बिना छठ पूजा पूरी नहीं होती.

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