रात को सोने से पहले स्क्रीन का करते हैं इस्तेमाल, इन बीमारियों का बना रहता है खतरा
नींद की गुणवत्ता पर असर: मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे नींद नहीं आती या बार-बार टूटती है.
आंखों की रोशनी कमजोर होना: रात को अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखें जल्दी थकती हैं, ड्रायनेस, जलन और धुंधलापन होने लगता है. लंबे समय तक ये आदत आंखों की रोशनी कमजोर कर सकती है.
मानसिक स्वास्थ्य पर असर: सोशल मीडिया या ओवरथिंकिंग कंटेंट रात में देखने से दिमाग एक्टिव रहता है, जिससे नींद नहीं आती और व्यक्ति चिड़चिड़ा या डिप्रेस्ड महसूस करने लगता है.
सिरदर्द और माइग्रेन: अंधेरे में स्क्रीन की ब्राइटनेस आंखों और मस्तिष्क पर दबाव डालती है जिससे माइग्रेन या लगातार सिरदर्द की शिकायत हो सकती है.
मोटापा और मेटाबोलिज्म गड़बड: रात को स्क्रीन देखने से देर तक जागने की आदत पड़ जाती है, जिससे नींद की कमी होती है. यह मेटाबोलिज्म को स्लो कर देती है और शरीर में फैट जमा होने लगता है.
हार्मोनल असंतुलन: नींद में खलल पड़ने से शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल रिदम पर असर पड़ता है, जो महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता और पुरुषों में थकान या सेक्सुअल डिसऑर्डर का कारण बन सकता है.