क्या इलेक्ट्रिक कारें चलाने वाले ज्यादा हो रहे बीमार? डॉक्टरों से जानें यह बात कितनी सच
हाल ही में कुछ ऑटोमोटिव और हेल्थ एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इलेक्ट्रिक वाहन चलाने वाले कुछ लोगों में सेहत संबंधित दिक्कतें देखी गईं. इनमें मोशन सिकनेस, सिरदर्द, थकान और चक्कर जैसी शिकायतें शामिल हैं.
कई रिसर्च में यह दावा किया गया है कि पारंपरिक वाहनों में इंजन का शोर और कंपन ड्राइवर को गति का अहसास कराते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों में यह शोर न के बराबर होता है. इससे मस्तिष्क और गति-बैलेंस को कंट्रोल करने वाले वेस्टिबुलर सिस्टम के बीच तालमेल में कमी आ सकती है, जिसकी वजह से मोशन सिकनेस हो सकती है.
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि मेहता कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों काफी शांति से चलते हैं. इतने शांत माहौल में कुछ लोगों को मोशन सिकनेस यानी चक्कर या जी मिचलाने की समस्या हो सकती है. कई लोगों को इस तरह की दिक्कत हवाई जहाज या तेज रफ्तार वाली ट्रेनों में भी हो सकती है.
बता दें कि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी और मोटर सिस्टम की वजह से इलेक्ट्रिकल मैग्नेटिक फील्ड बनाते हैं. वहीं, कई स्टडी में सामने आया है कि लंबे वक्त तक EMF के कॉन्टैक्ट में रहने से सिरदर्द, थकान और नींद में दिक्कत हो सकती है.
हालांकि, डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों से पैदा होने वाला EMF का लेवल सामान्य रूप से सेफ होता है. यह लेवल मोबाइल फोन, वाई-फाई राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से पैदा होने वाले EMF से ज्यादा अलग नहीं है.
एनवायरनमेंट हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. प्रिया शर्मा का कहना है कि EMF से संबंधित दिक्कतें अभी पूरी तरह साबित नहीं हो पाई हैं. कुछ लोगों को इससे दिक्कत हो सकती है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों से लोग बीमार पड़ रहे हैं, यह कहना जल्दबाजी होगी. अभी इस पर काफी रिसर्च करने की जरूरत है.