ये 5 तरीके जान लिए तो लोहे जैसी मजबूत हो जाएंगी हड्डियां, इन बीमारियों का खतरा भी होगा दूर
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती है, जिससे हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है. यह तब होता है जब हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और उनकी संरचना कमजोर हो जाती है.
कैल्शियम और विटामिन डी, हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने में मदद करता है. कैल्शियम डेयरी उत्पादों, हरी पत्तेदार सब्जियों और कुछ फलों में पाया जाता है, जबकि विटामिन डी सूर्य के प्रकाश, वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी और दूध-दही से मिलता है.
ऑस्टियोपोरोसिस को ठीक करने में प्रोटीन मदद कर सकता है. प्रोटीन हड्डियों के निर्माण और मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सीमित मात्रा में प्रोटीन का सेवन हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और फ्रैक्चर के खतरे को कम करने में मदद करता है. मांस, मछली, अंडे, दूध, दही, छाछ, बीन्स, दाल, टोफू और नट्स प्रोटीन के अच्छे सोर्स हैं.
धूम्रपान और शराब का सेवन दोनों ही ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को बढ़ा सकते हैं. धूम्रपान हड्डियों के घनत्व को कम करता है और शराब का अत्याधिक सेवन हड्डियों को कमजोर करता है और फ्रैक्चर के खतरे को बढ़ाता है.
एक्सरसाइज करने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है. एक्सरसाइज, खासकर वजन उठाने वाले व्यायाम, हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करते हैं. नियमित व्यायाम से हड्डियों के घनत्व में सुधार होता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा कम होता है.
प्रारंभिक जांच के जरिए ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने के लिए हड्डी घनत्व परीक्षण (BMD) करवाना, हेल्दी डाइट लेना, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना और गिरने से बचने के उपाय शामिल हैं. हड्डियों की प्रारंभिक जांच आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और रजोनिवृत्ति से गुजर रही महिलाओं के लिए नियमित की जानी चाहिए. यदि किसी व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डी टूटने का खतरा ज्यादा है तो 50 वर्ष से कम उम्र में भी जांच की जा सकती है.